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..जब पीड़ित परिवार के सदस्य बन गए एसडीएम

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सुल्तानपुर। लेखपाल साहब! मैं संगीता देवी के परिवार से बोल रहा हूं। संगीता की वरासत कर दीजिए, जो पैसा लगता है उसे दे देंगे। जवाब में लेखपाल ने कहा कि कौन बोल रहे हो। संगीता बिना मतलब दौड़ रही है, उसकी और बहनें भी हैं। इतना सुनते ही एसडीएम अपने असल रूप में आ गए। उन्होंने अपना परिचय बताते हुए लेखपाल को सुधरने की चेतावनी दे डाली। इसके साथ ही दो दिन में संगीता और उसकी बहनों, ग्राम प्रधान का बयान दर्ज करते हुए वरासत दर्ज करने का निर्देश दिया। एसडीएम की आवाज सुनते लेखपाल पसीना-पसीना हो गया। उसने माफी मांगते हुए निर्धारित समय में कार्य पूरा करने की बात कही।
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मंगलवार को जनता दर्शन में एसडीएम जयसिंहपुर अरविंद कुमार कार्यालय में फरियादियों की सुनवाई कर रहे थे। इस दौरान महमूदपुर सेमरी निवासी महिला संगीता एसडीएम के सामने पेश हुई। महिला ने लेखपाल पर भूमि की वरासत नहीं दर्ज करने व दौड़ाने का आरोप लगाया। महिला का दर्द सुनते ही एसडीएम ने तुरंत पीड़ित परिवार का सदस्य बनकर लेखपाल को अपने व्यक्तिगत मोबाइल नंबर से फोन कर दिया। एसडीएम ने महिला को कार्य कराने का भरोसा दिलाते हुए उसे जाते-जाते किराया भी अपने पास से दिया। इसके साथ ही एक अन्य मामले में एसडीएम ने लेखपाल को किसान दुर्घटना बीमा योजना का लाभ दिलाने के लिए लेखपाल को सही रिपोर्ट लगाने का निर्देश दिया।
एसडीएम ने बताया कि महिला का दर्द सुनने के बाद वे पीड़ित परिवार का सदस्य बनकर हकीकत जानना चाह रहे थे। लेखपाल ने यदि पैसे की मांग की होती तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाती। बताया कि पीड़ितों का कार्य अविलंब कराया जाएगा। कार्य नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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