सुल्तानपुर। करीब 15 साल पहले जुल्फिकार अहमद की गोली मारकर हुई हत्या व लूट सहित अन्य आरोपों से जुड़े मामले में एडीजे चतुर्थ राकेश यादव की अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया। अदालत ने अभियोजन पक्ष के जरिये केस साबित नहीं कर पाने पर जेल काट रहे आरोपी संदीप शुक्ल व जमानत पर चल रहे आरोपी विश्राम पासी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
अमेठी जिले के जामो की रहने वाली विलकिश बानो ने 24 मार्च 2012 की घटना बताते हुए जगदीशपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप के मुताबिक उनके पति जुल्फिकार अहमद दवा लाने के लिए जगदीशपुर स्थित इंडोगल्फ जा रहे थे। रास्ते में रामलीला मैदान के आगे मोटरसाइकिल सवार तीन अज्ञात बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी थी। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना के दौरान जगदीशपुर के डोमाडीह निवासी आरोपी संदीप शुक्ल व मऊ बतवारा निवासी विश्राम पासी का नाम सामने आया। उन्हें पुलिस ने जेल भेजा था। आरोपी संदीप को जेल जाने के बाद से जमानत नहीं मिल सकी थी। वहीं, आरोपी विश्राम पासी जमानत पर चल रहा है।