पयागीपुर चौराहे पर बने पंडाल के बगल से गुजरी एचटी लाइन। संवा
सुल्तानपुर। मां दुर्गा के स्वागत की तैयारी के बीच शहर के दुर्गा पूजा पंडालों पर बिजली के तारों का खतरा मंडरा रहा है। कहीं हाईटेंशन लाइन पंडाल के ठीक ऊपर से गुजर रही है तो कहीं सजावट के दौरान तार सिर के बेहद करीब हैं। हादसे की आशंका के चलते पूजा समितियों को पंडाल और प्रतिमाओं की ऊंचाई तक घटानी पड़ रही है। जिन स्थानों पर पहले 20 फीट ऊंचे पंडाल बनते थे, वहां अब 10 फीट या उससे कम ऊंचाई में काम चलाया जा रहा है।
शहर में 130 से अधिक पूजा पंडाल स्थापित होते हैं। इनमें 50 से ज्यादा स्थानों पर बिजली की लाइनें सुरक्षा के लिए चुनौती बनी हुई हैं। चौक के ठठेरीबाजार में बड़ी दुर्गा का पंडाल इसका उदाहरण है। यहां पंडाल से महज तीन फीट ऊपर हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। समिति के उपाध्यक्ष दिनेश चौरसिया ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से दर्जनों सदस्य सजावट में जुटे हैं। तारों के इतने करीब काम करना जोखिम भरा है।
तारों पर चढ़ाए प्लास्टिक पाइप
पयागीपुर समिति के सत्यवीर यादव ने बताया कि बचाव के लिए हाईटेंशन तारों के कुछ हिस्सों पर प्लास्टिक पाइप चढ़ाए गए हैं। जिससे खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। पयागीपुर, शाहगंज, गंदानाला रोड, चौक, ठठेरीबाजार, मुरारीदास गली, सब्जीमंडी और गभड़िया समेत 50 से अधिक स्थानों पर बिजली की लाइनें पंडालों के आसपास से गुजर रही हैं। अधिशासी अभियंता अश्वनी कुमार वर्मा ने बताया कि बिजली के तारों की केबलिंग के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। तारों को कसवाने और पेड़ों की टहनियों की छंटाई का काम कराया गया है।
बिजली की लाइन के नीचे न बनाएं पंडाल पंडाल के चारों ओर 4.5 मीटर खुला स्थान रखने और बिजली की लाइन के नीचे पंडाल नहीं बनाने के निर्देश हैं। रेलवे लाइन, बिजली उपकेंद्र, चिमनी या भट्ठी से पंडाल की दूरी कम से कम 15 मीटर होनी चाहिए। निकास द्वार पांच मीटर चौड़ा और आर्च की ऊंचाई कम से कम पांच मीटर होनी चाहिए। निकास का रास्ता गुफानुमा नहीं होना चाहिए। प्रत्येक 12 कुर्सियों के बाद 1.5 मीटर जगह छोड़ने और कुर्सियां किनारों पर पर्याप्त स्थान रखते हुए लगाने के निर्देश दिए गए हैं।