अपने वायदे पूरे करे सरकार
भारतीय किसान यूनियन के नेता धर्मेंद्र मलिक ने रविवार को एक बयान जारी कर गन्ने के मूल्य में हुई वृद्धि को किसानों के साथ किया गया मजाक बताया है। उन्होंने कहा कि गन्ना मूल्य परामर्शदात्री समिति ने स्वयं यह बताया था कि गन्ने का उत्पादन मूल्य 350 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। भाजपा ने भी चुनाव में गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 370 रुपये प्रति क्विंटल करने की घोषणा की थी। इस प्रकार यदि सरकार ने गन्ने का मूल्य 25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर भी अपना वायदा पूरा नहीं किया है।
मलिक ने कहा कि पड़ोसी राज्यों में गन्ने का मूल्य 362 रुपये प्रति क्विंटल तक है, जबकि इन राज्यों में बिजली की कीमतें बहुत कम हैं, जिससे गन्ने के उत्पादन में अपेक्षाकृत कम लागत आती है। ऐसे में सरकार को अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर गन्ने का मूल्य उचित दर पर लाने का प्रयास करना चाहिए।
वरूण ने बढ़ाई सरकार की मुश्किल
योगी आदित्यनाथ सरकार ने चुनाव के पहले गन्ने के दामों में वृद्धि कर किसानों की नाराजगी कम करने की कोशिश की थी, लेकिन भाजपाई खेमे से ही सरकार की कोशिशों को जोर का झटका लगा है। भाजपा सांसद वरूण गांधी ने एक बार फिर किसानों के हक में अपनी आवाज उठाई और कहा कि कृषि उत्पादन की लागत काफी बढ़ चुकी है। गन्ने की फसल का मूल्य न्यूनतम 400 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि के बाद इस समय यह 350 रुपये प्रति क्विंटल है। उन्होंने कहा है कि यदि सरकार किसी तकनीकि कारणों से सीधे वृद्धि न कर सके तो उसे 50 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस देने की नीति अपनानी चाहिए।