एक दरोगा पूरे महकमे के लिए चुनौती बन गया। उसे जमीन खा गई या आसमान निगल गया...। कभी मुरादाबाद में विधायक के घर पर उसकी लोकेशन मिली तो कभी लखनऊ में पुलिस अफसर के आवास पर।
लेकिन पुलिस ने आज तक कहीं भी दबिश नहीं दी। थाना पुलिस ने भी पड़ताल बंद कर दी तो अफसर भी चुनाव का बहाना बनाकर चुप्पी साधकर बैठ गए हैं।
कानूनगोयान के सर्राफ सतेंद्र रस्तोगी के अपहरण, हत्याकांड और फिर लाश को रामपुर के पटवाई में फेंके जाने के मामले में मूंढापांडे के पूर्व एसओ सैयद मंसूर आबिद और उसके चार हमराहों का नाम सामने आया था।