इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने उत्तर प्रदेश सिविल सेवा परीक्षा के साक्षात्कारों पर रोक लगा दी है। ये साक्षात्कार 26 जुलाई से शुरू होने वाले थे।
कोर्ट के इस आदेश के बावजूद आरक्षण विरोधी छात्रों ने जुलूस निकाला। जुलूस का रास्ता सलोनी मोहल्ला रखा गया, जहां ओबीसी के छात्र बहुतायत में रहते हैं। प्रशासन ने इसका विरोध किया, लेकिन छात्र नहीं माने। इन्हें रोकने के लिए पुलिस ने जबरदस्त लाठीचार्ज किया।
उच्च न्यायालय ने लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में लागू त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए एक अगस्त तक रोक लगाई है।
गौरतलब है कि लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में इस वर्ष से त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था लागू की गई थी, जबकि पहले परिणाम आने के बाद आरक्षण लागू किया जाता था।
नई व्यवस्था में प्रिलिमिनरी, मुख्य परीक्षा और उसके बाद साक्षात्कार में भी आरक्षण लागू किया जाना प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश में छात्र नई आरक्षण व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं। विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि इससे आरक्षण करीब 70 प्रतिशत पहुंच रहा है, जबकि संविधान के मुताबिक आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
नई व्यवस्था से सामान्य वर्ग की अनारक्षित सीटों में से पिछडे़ वर्ग को भी सीटें मिल जाती। आयोग ने परीक्षाओं के साक्षात्कार की तिथि 26 जुलाई रखी थी।
आरक्षण के विरोध में सुधीर कुमार सिंह और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि वर्ष 1994 में लोक सेवा आयोग ने प्रावधान किया कि किसी परीक्षा के अंतिम चरण में आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।
इसके बाद पचास फीसदी सीटें जनरल की मेरिट से भरी जाएंगी और पचास फीसदी आरक्षण की मेरिट से। लेकिन परीक्षा के दौरान हर स्तर पर आरक्षण लागू करके एक जाति विशेष के लोगों को अनुचित लाभ देने की कोशिश की जा रही है।
उच्च न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
याचिका में उठाए गए बिंदु
- सामान्य वर्ग की लोएस्ट मेरिट में आने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को जनरल कैटेगरी में अंतिम चयन के समय ही मौका दिया जा सकता है, परीक्षा के बीच में नहीं।
- एक चयन प्रक्रिया में एक ही बार आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है।
आयोग की सफाई
- 1994 की आरक्षण नियमावली एक्ट चार के तहत आयोग चयन का फार्मूला तय करने के लिए स्वतंत्र है।
- आरक्षण मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में दिया जा रहा है प्रारंभिक परीक्षा में नहीं।
- कोई नया परिवर्तन नहीं किया गया है, जैसा नियमों में वर्णित है वैसा ही हो रहा है।
राज्य सरकार का पक्ष
- आयोग के पक्ष का समर्थन। राज्य सरकार से जवाब नहीं मांगा गया था, कोई लिखित हलफनामा दाखिल नहीं किया।