सपा नेता को इंतजार कराने पर मातहत तीन पुलिस वालों (फालोवर) को डंडे और वाइपर से पीटने के आरोप में मुरादाबाद के एसएसपी राजेश मोदक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर मारपीट व अभद्रता के आरोप में रविवार को मोदक को निलंबित करने के आदेश जारी किए गए।
निलंबन की अवधि में मोदक डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध रहेंगे। तीनों फालोवर अब मोदक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी में हैं। पूरे दिन अधिकारी उन्हें मनाने की कोशिश में जुटे रहे, लेकिन वह नहीं माने।
इस संबंध में एसएसपी के बंगले पर तैनात तीन फालोवरों ने डीआईजी से मिलकर मारपीट की शिकायत की थी। पुलिस विभाग चतुर्थ श्रेणी एसोसिएशन ने डीजीपी डीआर नागर को दरख्वास्त देकर कार्रवाई की मांग की थी। कार्रवाई न होने की दशा में कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी थी।
मामला शनिवार सुबह करीब 11 बजे का है। पूर्व मेयर व सपा के सांसद प्रत्याशी डॉ. एसटी हसन एसएसपी राजेश मोदक से मिलने उनके कैंप कार्यालय पर पहुंचे थे।
पीआरओ ने उन्हें कैंप आफिस में बैठाकर फालोवर से एसएसपी को संदेश देने को कहा। किन्हीं वजहों से यह संदेश एसएसपी तक नहीं पहुंचा।
एक घंटे इंतजार करने के बाद सपा नेता ने खुद एसएसपी को फोन मिलाया। फोन मिलते ही एसएसपी खुद आवास से बाहर निकले और हसन से बातचीत कर उन्हें रवाना किया।
इसके बाद एसएसपी ने ड्यूटी कर रहे तीन फालोवर गुमान सिंह, सुंदर और दयाकिशन को बुलाकर फटकार लगाई। तीनों फालोवर अपनी शिकायत लेकर रेंज डीआईजी अमरेंद्र कुमार सेंगर के पास भी गए थे।
फालोवरों का आरोप है कि एसएसपी ने उन्हें डंडे, वाइपर और झाड़ू से पीटा। डीआईजी ने मामले की जांच का आश्वासन दिया था।
इससे पहले मुजफ्फरनगर दंगे के मामले में वहां के एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे को शासन ने निलंबित किया था। पिछले एक हफ्ते के दौरान मोदक दूसरे आईपीएस हैं, जिन्हें सस्पेंड किया गया है।
डॉ. हसन बोले, एक घंटे इंतजार कराया
मैं बीस सितंबर की रात को करीब नौ बजे एसएसपी राजेश मोदक से मिलने उनके आवास पर गया था। यहां मौजूद पीआरओ और रिसेप्शन पर बैठे लोगों ने बताया कि कप्तान साहब मंदिर गए हुए हैं उन्हें आने में देर होगी।
लिहाजा मैं लौट आया। रात को करीब दस बजे एसएसपी का फोन आया कि आप आए थे बिना मिले ही चले गए। मैंने कहा कि आपके स्टाफ ने मंदिर जाने की बात कही थी। उस वक्त एसएसपी ने बताया था कि वह तो अपने आवास पर ही थे।
खैर अगले दिन के लिए मुलाकात का कार्यक्रम तय हो गया। 21 सितंबर को सुबह करीब सवा दस बजे मैं फिर उनके आवास पर पहुंचा।
मैंने स्टाफ से कहा कि वह एसएसपी को जानकारी दे दें। लेकिन बैठे-बैठे एक घंटा हो गया तो मैंने खुद ही उनके मोबाइल पर काल की।
वह आवास से बाहर आ गए और स्टाफ को फटकार लगाई। सस्पेंड करने की भी चेतावनी दी थी। उसके बाद क्या हुआ मुझे नहीं पता।