उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं जहां विशेषज्ञों की कमी से जूझ रही हैं, अस्पतालों में कई पद खाली पड़े हैं, वहीं प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सकों की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) में कुर्सी की ललक बढ़ती जा रही है।
30 फीसदी बन गए सीएमओ
बाराबंकी के सीएमओ डॉ. डीआर सिंह और उन्नाव के सीएमओ डॉ. डीपी मिश्र तो महज दो उदाहरण हैं। राजधानी लखनऊ से लेकर प्रदेश के 74 जिलों में से 30 फीसदी सीएमओ विशेषज्ञ संवर्ग के हैं। ये सभी मरीजों के इलाज से पूरी तरह दूर हो चुके हैं, जबकि सरकार अस्पतालों में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं देने की कवायद में जुटी है।
कई अच्छे डॉक्टर बने सीएमओ
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. एसएनएस यादव ने लखनऊ स्थित बलरामपुर अस्पताल की डायलिसिस यूनिट लंबे समय तक अपने ही दम पर चलाई, लेकिन अब वे सीएमओ बनकर राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की कवायद में जुटे हैं। इसी तरह संभल के सीएमओ डॉ. उमराव सिंह सर्जन तथा सुल्तानपुर के सीएमओ डॉ. एसपी सिंह बाल रोग विशेषज्ञ हैं।
हमीरपुर में सीएमओ की कुर्सी पर काबिज डॉ. राम चरण सिंह एनेस्थेटिस्ट हैं। अलीगढ़ में डॉ. अर्जुन सिंह हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। पीलीभीत केसीएमओ डॉ. राकेश तिवारी सर्जन हैं। बिजनौर की सीएमओ डॉ. कविता भट्ट स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं। गाजियाबाद के सीएमओ डॉ. अजय अग्रवाल हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं।
कई और भ्री कतार में
आजमगढ़ के सीएमओ डॉ. वीबी सिंह, हरदोई के डॉ. अनुराग और चित्रकूट के सीएमओ डॉ. वेदप्रकाश भी विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। हापुड़, गौतमबुद्ध नगर और मुजफ्फरनगर के सीएमओ की कुर्सी पर भी विशेषज्ञ चिकित्सक काबिज हैं। यही नहीं, सीएमओ के अलावा एसीएमओ और डिप्टी सीएमओ बनने वाले कई विशेषज्ञ चिकित्सक भी अब मरीजों की सेवा से दूर हो चुके हैं और प्रशासनिक अधिकारी बनकर स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने का दावा कर रहे हैं।
पदाधिकारी बनते ही दावेदारी पक्की
विशेषज्ञ चिकित्सक से सीएमओ बनने के लिए सरकार और शासन में पैठ के साथ ही प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ का पदाधिकारी होना भी दावेदारी को मजबूत करता है। वर्तमान में बाराबंकी सीएमओ डॉ. डीआर सिंह और उन्नाव सीएमओ डॉ. डीपी मिश्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं संघ में महामंत्री रहे हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. जय सिंह ने भी कानपुर सीएमओ के पद पर लंबे समय तक कब्जा जमाए रखा।
''कुछ विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती बदलने से कुछ नहीं होगा। प्रदेश को 33 हजार विशेषज्ञ चिकित्सक चाहिए, जबकि हैं सिर्फ 3600। जनता को विशेष स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना होगा।''
-डॉ. अशोक यादव, अध्यक्ष, प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ