लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद जिले के सपा नेताओं ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की जीत का जश्न नहीं मनाया। लोगों से मिलने और मीडिया से बात करने से भी परहेज किया। क्योंकि आजमगढ़ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को जीत जरूर नसीब हो गई लेकिन इसे कहीं से शानदार नहीं कहा जा सकता।
जबकि पार्टी के दिग्गज नेता उन्हें भारी मतों से जिताने के लिए जुटे थे। सभी कवायद करने के बाद भी मुलायम सिंह यादव को मात्र 63204 वोटों से ही जीत मिल सकी, जबकि जिले के नेताओं ने शानदार जीत का आश्वासन दिया था।
लोकसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद से जिले के सपा नेता खामोश हैं। पूरे प्रदेश में लगभग सफाया और मुलायम सिंह की जीत के कम अंतर से सपा नेता निराश हैं।
सपा के लिए परिणाम निराशाजनक
जिले की 10 विधानसभा सीटों में नौ पर सपा के विधायक हैं। इनमें दो कैबिनेट मंत्री, एक राज्य मंत्री और तीन दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री हैं। इसके बावजूद सपा के लिए परिणाम निराशाजनक रहा। शनिवार को सपा नेताओं के घरों में सन्नाटा रहा। एक-दुक्का नेता ही नजर आए।
सपा नेता लोगों से बात करने से बच रहे थे। तमाम नेता फोन भी नहीं उठा रहे थे। राजनैतिक जानकारों का कहना है कि नेताजी को जिताने के लिए प्रदेश सरकार के मंत्री, विधायक, नेता और कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक कर दिया।
मुलायम को नहीं मिल सकी बड़ी जीत
इटावा, मैनपुरी और फिरोजाबाद सहित पश्चिम के कई जिले के मंत्री, विधायक और नेता एक मई के बाद यहां जुट गए थे। सबकी कोशिश थी कि अधिक से अधिक वोटों से नेताजी को जिताया जाए, लेकिन परिणाम बहुत संतोषजनक नहीं रहा।
जानकारों का कहना है कि अगर सिर्फ यादव और मुस्लिम वोट भी मुलायम को मिलते तो शायद उन्हें और बड़ी जीत हासिल होती।
शायद मुलायम सिंह यादव को आखिरी दौर में इसका एहसास हो गया था, तभी उन्होंने आखिरी जनसभा में नरेंद्र मोदी की तुलना में अधिक वोटों से जिताने का आह्वान किया था। जानकारों का कहना है कि अब सपा नेताओं को चाहिए कि वे इस रिजल्ट का आकलन कर कमियों को दूर करें, तभी उन्हें तीन साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में जीत हासिल हो सकती है।