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रालोद की नाव पर सवार होकर डूब गईं जयाप्रदा

Sun, 18 May 2014 06:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर
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जयाप्रदा रामपुर संसदीय सीट से लगातार दो बार लोकसभा का चुनाव जीती, लेकिन इस बार उनको बिजनौर में करारी हार का सामना करना। बिजनौर में रालोद के टिकट पर चुनाव समर में उतरीं जयाप्रदा को मात्र 24348 वोट मिले।
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इससे पहले जयाप्रदा ने रामपुर से 2004 में 289390 और 2009  में 230724 वोट हासिल हुए थे। जयाप्रदा को बिजनौर में मिली करारी हार से रामपुर में उनके समर्थक भी निराश हैं।

जयाप्रदा 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान यूपी की राजनीति में कदम रखा था।

सपा से शुरुआत, रालोद पर खत्म!

रामपुर से वो सपा की टिकट पर चुनावी मैदान में उतरीं। उस वक्त उनको रामपुर में आजम खां का साथ मिला और वो 289390 वोट पाकर भारी मतों से चुनाव जीतीं। इसके बाद 2009 में फिर से सपा ने उनको टिकट दिया। इस बार आजम खां ने उनका विरोध किया।

इसके बाद भी वो 230724 वोट पाकर चुनाव जीतने में सफल रही। चुनाव जीतने के कुछ साल बाद उनको पार्टी ने अमर सिंह के साथ बाहर का रास्ता दिखा दिया था। सपा से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद भी जयाप्रदा का रामपुर से रिश्ता बना रहा। वो यहां आती जाती रहीं।

इस साल के शुरू तक वो कहतीं रहीं कि वो रामपुर से ही चुनाव लड़ेंगी। रामपुर को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगी, लेकिन अचानक बदली हुई परिस्थितियों में वो अमर सिंह के साथ रालोद में शामिल हो गईं।
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'रामपुर छोड़कर जयाप्रदा ने किया गलत'

जानकारों की मानें तो जयाप्रदा के भाजपा और कांग्रेस से चुनाव लड़ने का ऑफर था। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडगरी से उनकी मुलाकात भी हुई थी। भाजपा उनको रामपुर से चुनाव लड़ने को तैयार थी, लेकिन वो अमर सिंह को भी अपने साथ पार्टी में लाना चाहती थीं। भाजपा इसके लिए तैयार नहीं हुई। इसके बाद जयाप्रदा ने कांग्रेस से नजदीकियां बढ़ाई।

कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी उनकी कई दौर की मुलाकात हुई। कांग्रेस को उनको मुरादाबाद से टिकट देने को तैयार थी। जयाप्रदा का मुरादाबाद से टिकट लगभग पक्का मना जा रहा था। इस बीच जयाप्रदा रालोद के साथ चली गई। जयाप्रदा रालोद के टिकट पर बिजनौर से चुनाव लड़ीं बुरी तरह से पराजित हुईं।

जयाप्रदा को मिली करारी हार के बाद उनके समर्थक काफी निराश हैं। जया प्रदा के रामपुर छोड़ने के बाद उनके कई समर्थक भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य दलों में चले गए। रामपुर में जयाप्रदा के प्रतिनिधि मुस्तफा हुसैन का कहना है कि बिजनौर में मिली हार से उनके समर्थकों को दुख हुआ है। राजनीति में उतार-चढ़ाव चलता रहता है। आशुतोष सिंह का कहना है कि जया प्रदा का रामपुर छोड़ने का फैसला गलत था। अगर वो चाहती तो उनको यहां से किसी न किसी राजनीतिक दल से टिकट अवश्यक मिल जाता। जयाप्रदा रामपुर से चुनाव लड़तीं तो उनको सफलता अवश्य मिलती।
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