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डायलिसिस के लिए अब नहीं करना होगा इंतजार, डायलिसिस केंद्र में बढ़ेगी बेडों की संख्या

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किडनी की बीमारी से ग्रसित मरीजों को डायलिसिस के लिए जिला अस्पताल में बेड खाली होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मरीजों की समस्या को देखते हुए जिला अस्पताल प्रशासन ने बेड बढ़ाने की कवायद में जुट गया है। इसके लिए सीएमएस ने प्रस्ताव तैयार कर महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को भेजा है। वहां से हरी झंडी मिलते ही बेड बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अस्पताल में फिलहाल 42 मरीजों की डायलिसिस हो रही है, जबकि 16 से अधिक प्रतीक्षा सूची में हैं।
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जिला संयुक्त चिकित्सालय में 29 मई 2019 से पीपीपी मॉडल के अंतर्गत हेरिटेज हॉस्पिटल की ओर से हेमो डायलिसिस केंद्र का संचालन किया जा रहा है। इसमें मरीजों के लिए छह बेड है। पांच बेड सेरो नेगेटिव और एक बेड सेरो पॉजिटिव के लिए है। वर्तमान में करीब 42 मरीजों का डायलिसिस हो रहा है। जबकि 16 सेरो निगेटिव मरीज प्रतीक्षा सूची में है। वे अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं। इस देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से डायलिसिस सेंटर में बेड बढ़ाने की पहल तेज कर दी गई है। जिला संयुक्त चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. क्रांति कुमार ने कहा कि सेंटर में बेड कम होने से कुछ मरीजों को वाराणसी समेत अन्य जगहों पर डायलिसिस कराने के लिए जाना पड़ता है। इतना ही नहीं प्राइवेट में काफी खर्च होने की वजह से बहुत सारे मरीज अपनी किडनी का इलाज नहीं करा पाते है। उनकी समस्याओं को देखते हुए डायलिसिस सेंटर में बेड बढ़ाने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा लिखा गया है।
डायलिसिस में लगते है चार घंटे
एक मरीज के डायलिसिस में लगभग 4 घंटे समय लगते हैं। इस वजह से जिला अस्पताल में प्रतिदिन अधिकतम 42 मरीजों का ही डायलिसिस किया जा सकता है। किडनी मरीजों को डायलिसिस के लिए एक बार में 2 से 3 हजार रुपये लगते हैं, लेकिन अब उन्हें जिला अस्पताल ने निशुल्क डायलिसिस की सुविधा मिल रही है। बेड बढ़ने से काफी राहत मिलेगी।
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जिला संयुक्त चिकित्सालय में पीपीपी मॉडल के अंतर्गत मेसर्स हेरिटेज हॉस्पिटल द्वारा संचालित हेमो डायलिसिस केंद्र में छह बेड है। मरीजों के बढ़ने से इलाज में दिक्कत होती है। बेड बढ़ाने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है। बेड बढ़ने से काफी राहत मिलेगी। - डॉ. क्रांति कुुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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