राबर्ट्सगंज स्थित प्रभा मंडपम में गीता चौपाल में सत्यपाल जैन को सम्मानित करते डॉ.बी सिंह
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योग केवल आसन-व्यायाम भर नहीं है, योग आत्मा का परमात्मा से मेल कराने की विधि है। योग मानव जीवन का अभीष्ट प्राप्त करने की कुंजी है। गीता के अनुसार योग परम आराध्य तक की दूरी तय करने का साधन है। ये बातें गीता जयंती पर मंगलवार को राबर्ट्सगंज के जयप्रभा मंडपम में गीता में वर्णित योग विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने कहीं। यह कार्यक्रम गीता जयंती समारोह समिति की तरफ से आयोजित किया गया।
अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार अजय शेखर ने कहा कि मानव जीवन संघर्ष से भरा रहता है। गीता का योग उस संघर्ष से निकलने का पथ प्रशस्त करता है। यह आध्यात्म की राह है। स्वागत करते हुए कवि जगदीश पंथी ने धार्मिक भ्रांतियों के निवारण पर बल दिया। संयोजक डॉ. बी सिंह ने कहा कि महर्षि पतंजलि ने गीता के योग का ही एक सरल स्वरूप प्रस्तुत किया। वास्तव में गीता का योग आत्मा को परमात्मा से मिलाने की कुंजी है। उन्होंने कहा कि पूरी की पूरी गीता आध्यात्म है। विषय प्रवर्तन करते हुए अरुण चौबे ने कहा कि गीता के अनुसार जो संसार के संयोग वियोग से रहित है उसी का नाम योग है। योगाचार्य सचिन तिवारी ने प्रचलित योग और आध्यात्मिक योग में सामंजस्य स्थापित करते हुए बहिरंग और अंतरंग योग की व्याख्या की। डॉ. गोपाल सिंह, साहित्यकार पारसनाथ मिश्रा, भोलानाथ मिश्रा ने विचार रखे। गोष्ठी में यथार्थ गीता के अर्थों में गीता को राष्ट्रीय धर्मशास्त्र घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस मौके पर प्रदीप जायसवाल, पियुष त्रिपाठी, कृपाशंकर चौबे, प्रमोद श्रीवास्तव, दिलीप तिवारी, राजेश चौबे, राजू तिवारी, गणेश पाठक, रामसूरत सिंह, बृजेश सिंह, धीरेन्द्र दूबे, आशुतोष कुमार आदि मौजूद रहे।
गीता के प्रचार-प्रसार के लिए इन्हें किया गया सम्मानित
गीता जयंती के अवसर पर आयोजित गोष्ठी के दौरान प्रचार-प्रसार में लगे पांच शख्सियतों को गीता जयंती समारोह समिति ने सम्मानित किया। हंसवाहिनी इंटर कॉलेज कसयां के प्रधानाचार्य उमाकांत मिश्र, उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यपाल जैन, आध्यात्मसेवी रामानुज पाठक, समाजसेवी रामसूरत पटेल तथा शिक्षक एवं पत्रकार विवेकानंद मिश्रा को शाल ओढ़ाकर तथा सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान गोष्ठी के संयोजक डा. कुसुमाकर ने असहायों में कंबल वितरित किया।