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वाह क्या बात है!: झोपड़ी में रहने वाले इस धावक के नाम है राष्ट्रीय रिकॉर्ड, पगडंडियों पर करते थे अभ्यास

Sun, 07 May 2023 09:50 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र

सार

बहुअरा गांव की भैरवा गांधी बस्ती निवासी रामबाबू गरीब परिवार से हैं। उनके पिता छोटेलाल भूमिहीन खेत मजदूर हैं। एक छोटे से खपरैल के मकान में परिवार गुजारा करता है, जहां पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है। एक किमी दूर से रोजाना पानी लाना पड़ता है। बेहद विपरीत हालातों में भी रामबाबू ने हार नहीं मानी। गांव की पगडंडियों पर उन्होंने दौड़ना शुरू किया।
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धावक रामबाबू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महज छह माह पहले तक बहुअरा गांव के रामबाबू गुमनाम जिंदगी जी रहे थे। मजदूर पिता की इस संतान को कोई जानने वाला नहीं था। अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छा शक्ति के रामबाबू ने ऐसी शोहरत पाई कि आज हर कोई उन पर गुमान कर रहा है। गांव की कच्ची पगडंडियों पर दौड़ लगाने वाले रामबाबू ने एथलीट के रूप में देश भर में जाने जा रहे हैं। पैदल चाल का राष्ट्रीय रिकार्ड उनके नाम है। कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भी वह देश का मान बढ़ा रहे हैं। उनका चयन एशियाई खेलों के लिए भी हुआ है।

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बहुअरा गांव की भैरवा गांधी बस्ती निवासी रामबाबू गरीब परिवार से हैं। उनके पिता छोटेलाल भूमिहीन खेत मजदूर हैं। एक छोटे से खपरैल के मकान में परिवार गुजारा करता है, जहां पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है। एक किमी दूर से रोजाना पानी लाना पड़ता है। बेहद विपरीत हालातों में भी रामबाबू ने हार नहीं मानी। गांव की पगडंडियों पर उन्होंने दौड़ना शुरू किया। बेटे के लगन को देखते हुए पिता ने उन्हें खेलों के लिए प्रोत्साहित किया। दो वर्ष तक बंगलुरु में ट्रेनिंग के लिए भेजा। इस दौरान वह मजदूरी कर हर माह 5-7 हजार रुपये बेटे को भेजते रहे। पिता के इस त्याग और परिश्रम को रामबाबू ने भी जाया नहीं होने दिया। पिछले वर्ष अक्टूबर में गुजरात में आयोजित राष्ट्रीय खेलों की 35 किमी पैदल चाल स्पर्धा में रामबाबू ने जब राष्ट्रीय रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता तो उनके सफलता की गूंज पूरे देश में सुनाई दी। 

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रामबाबू - फोटो : अमर उजाला
जीत के बाद कहा था: अब घर पक्का हो जाएगा, हैंडपंप लग जाएगा
इस स्पर्धा में जीत के बाद रामबाबू ने पूछे गए सवाल में रामबाबू ने कहा था कि अब उनका घर पक्का हो जाएगा और एक हैंडपंप लग जाएगा, ताकि पिता को दूर से पानी नहीं लाना होगा। रामबाबू की इस उपलब्धि से पूरा प्रदेश और जनपद गौरवान्वित हुआ। डीएम ने उन्हें सम्मानित भी किया। उनके मां के नाम जमीन का पट्टा भी किया और पीएम आवास योजना के तहत उनका चयन भी किया। फिलहाल रामबाबू का चयन एशियाई खेलों के लिए हो चुका है। वह इसमें मेडल जीतने के लिए दिन-रात ट्रेनिंग में पसीना बहा रहे हैं। रामबाबू ने कहा कि खेल की बदौलत ही उन्हें यह सब हासिल हुआ है। अब उनकी कोशिश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल जीतना है।
 
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रामबाबू का घर - फोटो : अमर उजाला
जिसके नाम था रिकॉर्ड उसी को हराया

रामबाबू ने दो घण्टे 36 मिनट 34 सेकंड में 35 किमी की दूरी पूरी की। उन्होंने हरियाणा के जुनैद को हराकर उन्हीं का रिकॉर्ड तोड़ा था। इससे पहले राष्ट्रीय रिकॉर्ड जुनैद के नाम था, जिन्होंने दो घण्टा 40 मिनट 16 सेकंड में यह दूरी पूरी की थी।
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