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Sonebhadra News: खदान के रिकॉर्ड में नहीं होते मजदूर, पेटीदार रखते हैं ब्योरा

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सोनभद्र। खदान में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा कभी भी मालिकों की प्राथमिकता नहीं रही है। कानूनी पेंच से बचने के लिए वह पेटीदारों से काम कराते हैं। पेटीदार ही मजदूरों की व्यवस्था करते हैं और खदान मालिक की मंशा के अनुरूप खनन कराकर उनकी मजदूरी देते हैं। यही कारण है कि ज्यादातर खदानाें में मजदूरों को कोई ब्योरा ही नहीं होता। दिखावे के लिए हाजिरी रजिस्टर सहित अन्य दस्तावेज होते हैं, लेकिन इन पर खदान मालिकों की मर्जी से ही विवरण दर्ज होते हैं।
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पत्थर की खदानों में खनन का कार्य बेहद जोखिम भरा है। इसमें काम कराने के लिए तमाम सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है। मजदूरों को वह सारी सुविधाएं उपलब्ध करानी होती हैं। काम करने वाले मजदूरों का पूरा ब्योरा भी अंकित होना चाहिए, जिससे कभी कोई विवाद या घटना होने पर रिकॉर्ड से मिलान कर वस्तु स्थिति का पता लगाया जा सके। खदान क्षेत्र में आने-जाने का भी रिकाॅर्ड रखना होता है। पत्थर खदानों में इनमें से ज्यादातर मानक पूरे नहीं होते। खदान संचालक सिर्फ अपने मुनाफे से मतलब रखते हैं। शेष जिम्मेदारियों के लिए पेटीदार (छोटे ठेकेदार) नियुक्त किए जाते हैं। यही पेटीदार ही मजदूर जुटाते हैं, उनसे खनन कराते हैं और उनका हिसाब करते हैं। अक्सर वह बिना सुरक्षा उपकरण के ही मजदूरों को खदान में ले जाकर कार्य कराते हैं। कितने मजदूर आए-गए, इसका विवरण भी पेटीदार ही रखते हैं। खदान में हादसे के बाद से वहां काम करा रहे दो पेटीदार भी गायब है। यही कारण है कि वहां काम करने वाले मजदूरों की सही संख्या, नाम या अन्य जानकारी स्पष्ट नहीं हो पाई है।
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