सोनभद्र। बिल्ली मारकुंडी स्थित श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स की जिस खदान में हादसा हुआ था, उसमें सिर्फ सुधारात्मक कार्य करने की ही अनुमति थी। इसके बाद भी सुरक्षा निर्देशों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से खनन किया जा रहा था। खान सुरक्षा निदेशालय (डीजीएमएस) ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। क्षेत्र की अन्य खदानों की भी जांच की जाएगी। इसकेबाद जिम्मेदारी तय करते हुए संचालकों पर कार्रवाई की जाएगी।
श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स को भूमिधरी पट्टे का आवंटन मई 2016 में किया गया था। दस वर्ष के जारी पट्टे में शर्तों के तहत नियंत्रित खनन की ही अनुमति थी। इसे दरकिनार कर पट्टाधारक मनमाने ढंग से खनन करते हुए पत्थर-बोल्डर निकालते रहे। नतीजा खदान 200 फीट तक गहरी हो चुकी थी। इससे खतरे की आशंका को देखते हुए डीजीएमएस ने इसमें व्यावसायिक खनन पर पाबंदी लगा दी थी। बाद में यह कहते हुए अनुमति दी गई थी कि खदान में सिर्फ सुधारात्मक कार्य (धारा 22-सी) कराए जाएं, ताकि भविष्य में कोई दुर्घटना न हो। इसके तहत खनन के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए खदान में नियमानुसार बेंच बनाने, खतरनाक क्षेत्रों को सुरक्षित करने, ढीली मिट्टी को स्थिर करने कटाव और भूस्खलन रोकने जैसी गतिविधियां ही की जानी थीं। इसके बावजूद खदान संचालक मनमाने ढंग से न सिर्फ इसमें खनन करते रहे, बल्कि सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी होती रही। महज सात महीने तक शेष पट्टा अवधि के दौरान पर्याप्त पत्थर, गिट्टी निकालने की कोशिश मजदूरों की जिंदगी पर भारी पड़ी है। गहराई तक डि्रलिंग कर ब्लॉस्टिंग के चलते चट्टान ढह गई। अब डीजीएमएस ने असुरक्षित खदान में मनमाने ढंग से खनन की जांच शुरू कर दी गई है। डीजीएमस वाराणसी की टीम ओबरा-डाला की अन्य खदानों की भी जांच में जुटी है।
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खदान में इन कार्यों की अनुमति थी
खदान में सुधारात्मक कार्य से तात्पर्य उसे सुरक्षित बनाने से है। इसके तहत ढलानों को फिर से समतल करना, ढीली मिट्टी को स्थिर करना, कटाव और भूस्खलन को रोकना, बेंच बनाना, जिससे भूस्खलन होने पर मलबा सीधे गहराई में न जाए, पेड़-पौधे लगाकर मिट्टी को बांधना, मिट्टी, तलछट, भूजल से हानिकारक रसायनों को हटाना, भूमि को कृषि, मनोरंजन (जैसे पार्क या पैदल रास्ते) या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए उपयोगी बनाना, खतरनाक सामग्रियों को हटाकर और साइट की स्थिरता सुनिश्चित करके आसपास के समुदायों के लिए स्वास्थ्य जोखिम कम करना शामिल है।
वर्जन...
श्रीकृष्णा माइनिंग वर्क्स की खदान में 22-सी के प्रतिबंध लागू थे। इसके तहत खदान में सिर्फ सुधारात्मक कार्य की अनुमति दी गई थी। वहां किन परिस्थितियों में गहराई तक खनन कार्य चल रहा था, इसकी गहन जांच शुरू कर दी गई है। जांच प्रक्रिया पूरी हाेने के बाद सही स्थिति स्पष्ट होगी। उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - राजीव कृष्ण, खान सुरक्षा निदेशक वाराणसी।