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जाम: रेणुकूट-अनपरा मार्ग पर थम गए पहिए, स्कूलों में परीक्षा का बदलना पड़ा समय; ड्यूटी पर पहुंचने को पैदल भागे

Fri, 13 Sep 2024 10:40 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

Sonbhadra News: भीषण जाम के कारण सड़क पर हर कोई परेशान दिखा। बच्चों समय पर स्कूल नहीं पहुंच सके तो बड़े लोग अपने काम पर ऑट टाइम जाने में असमर्थ दिखे। यातायात पुलिस भी इस जाम को हटवाने में मशक्कत करती रही।
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भीषण जाम में फंसे ट्रक, बस और अन्य वाहन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रेणुकूट नगर में जाम अब नासूर बन गया है। जिम्मेदारों की बेरुखी और ओवरलोड वाहनों के बेखौफ़ संचालन से कोई ऐसा दिन नहीं ज़ब जाम न लग रहा हो। शुक्रवार को फिर रेणुकूट से अनपरा मार्ग पर वाहनों की गति थम गई। ऐसा जाम लगा कि स्कूलों को परीक्षा का समय बदलना पड़ गया।

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ड्यूटी पर पहुंचने के लिए कर्मचारी वाहन छोड़कर पैदल ही भागे। जाम की समस्या पर लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। नगर में आए दिन लग रहे जाम के बावजूद ओवरलोड ट्रकों के धड़ल्ले से संचालन के कारण प्रतिदिन लोगों को जाम का झाम झेलना पड़ रहा है। बीते दो दिनों से भी नगर सहित पिपरी क्षेत्र में जाम के कारण काफी परेशानी हुई।

गुरुवार की रात से नगर में लगा जाम शुक्रवार की सुबह तक चलता रहा, जिससे एक बार फिर स्कूली बच्चों और ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मजदूरों को बड़ी परेशानी हुई। तमाम मजदूर तो अपने कार्य पर नहीं पहुंच सके और स्कूली बच्चों को भी बस न आने के कारण घर वापस लौटना पड़ा। 

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नासूर बना यहां का जाम
नगर क्षेत्र के लोग आए दिन जाम लगने से परेशानी झेल रहें हैं। आये दिन लगने वाले जाम का मुख्य कारण ओवरलोड वाहन है जो अक्सर रास्ते में ही खराब हो जा रहे हैं। दो लेन की सड़क होने की वजह से जाम लग जा रहा है वहीं इसी जाम में फंसकर दूसरे ओवरलोड वाहन भी खराब हो जा रहे हैं, जिससे जाम की समस्या खत्म होने की बजाय बढ़ती जा रही है।

कोढ़ में खाज की स्थिति तो तब बन जाती है जब पटरियों पर बड़े-बड़े गड्ढे होने की वजह से गाड़ियां सड़क से नीचे नहीं उतर पाती। हाथीनाला से शक्तिनगर तक सड़क पर पटरियों के न होने से भी स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो रही है पटरियों पर जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढे भी जाम न हटने का कारण बन रहे हैं। यदि पटरियों को मिट्टी और पत्थर से ही भर दिया जाए तो इस पर गाड़ियां किनारे लग सकती है लेकिन इस संबंध में भी कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।



गुरुवार की रात भी वाहनों के खराब होने से जाम की स्थिति बढ़ती गई जो शुक्रवार की सुबह तक लोगों को जाम झेलना पड़ा। जाम की वजह से बस में फंसे यात्रियों को भी बस से उतरकर पदयात्रा करनी पड़ी, छत्तीसगढ़ निवासी निरंजन कुमार ने बताया कि वह मुर्धवा मोड़ से 2 किलोमीटर पहले जंगल में ही बस से उतरकर मुर्धवा मोड पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह सब प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। यदि प्रशासन ओवरलोड वाहनों का संचालन बंद कर दे तो ऐसी स्थिति नहीं होगी।
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