सोनभद्र। कोरोना कर्फ्यू के कारण किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। अधिकतर शादियां टलने, होटल, रेस्टोरेंट बंद होने कारण सब्जी की मांग में कमी आई है जिससे किसानों को काफी कम रेट पर सब्जियां बेचनी पड़ रही हैं। जिले में थोक भाव में भिंडी, टमाटर, बैंगन और लौकी काफी सस्ते दर पर बिक रही है जिससे किसानों की लागत नहीं निकल पा रही है।
जिले में करीब 16 हजार हेक्टेयर में सब्जी की खेती होती है। करमा, केकराही, मधुपुर और चंदौली जिले से सटे क्षेत्र में टमाटर की खेती बहुतायत मात्रा में होती है। इसके साथ ही अन्य हरी सब्जियों की खेती किसान करते हैं। करीब दो सप्ताह से कोरोना कर्फ्यू के चलते होटल, रेस्तरां बंद हो गए हैं। लगन के दिनों में भी कम शादियां हो रही है। इससे हरी सब्जियों की मांग कम हो रही है। इसका असर हरी सब्जियों के दाम पर देखने को मिल रहा है। मंडी में सब्जियों का रेट कम मिलने से किसानों का लागत निकलना मुश्किल हो रहा है। इससे सब्जी की खेती किए किसान परेशान हैं।
राबर्ट्सगंज नवीन सब्जी मंडी के आढ़ती पारस और अमित सोनकर का कहना है कि मंडी में इन दिनों बोड़ा 200 से 300, भिंडी 100 से 200, लौकी 300 से 400, टमाटर 300, कोहड़ा 200, खीरा 200, बैंगन 300 से 400, पालक 400, गोभी 500 से 1000 और करैला 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल थोक भाव बिक रहा है। वहीं लहसुन 200 से 600 रुपये क्विंटल बिक रहा है। वहीं शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में फुटकर में हरी सब्जी तीन से चार रुपये महंगी है।
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क्या कहते हैं किसान
राबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र के कुशी गांव में सब्जी की खेती करने वाले किसान अजय पटेल और मनोज कुमार का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू में होटल, रेस्टोरेंट बंद होने और अधिकतर शाटियां चलने से हरी सब्जियों की मांग कम हुई है। इसका असर सब्जी के दाम पर पड़ा है। कोरोना कर्फ्यू के पहले सब्जी के दाम अच्छे मिल जाया करते थे लेकिन कोरोना कर्फ्यू में तेजी से दाम में गिरावट आई है। इससे किसान परेशान हैं।
जिले में करीब 16 हजार हेक्टेयर में सब्जी की खेती होती है। कोरोना कर्फ्यू के कारण सब्जी की कीमतों में थोड़ी कमी आई है। इससे किसानों की आय पर बहुत प्रभाव नहीं पड़ेगा।-सुनील कुमार शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी-सोनभद्र।