सोनभद्र। जिले में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। प्रदूषण, दूषित पानी, कारखानों से निकलने वाला धुआं और खराब जीवन शैली इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। वहीं, लोढ़ी स्थित मेडिकल कॉलेज में कैंसर की पहचान के लिए जरूरी फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी (एफएनएसी) और बायोप्सी जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटर जाना पड़ता है।
डॉक्टरों के मुताबिक जिले में ब्लड कैंसर, मुख कैंसर, गले का कैंसर, बच्चेदानी का कैंसर, बोन कैंसर, लीवर और आंत के कैंसर के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पहले यह रोग सीमित थे और ज्यादातर तंबाकू-गुटखा खाने वाले ही प्रभावित होते थे। लेकिन अब पेट, प्रोस्टेट, फेफड़े, स्तन और गर्भाशय कैंसर जैसी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं।
मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद रोजाना 1200 से 1400 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि 80 से 100 मरीज इमरजेंसी में आते हैं। इनमें बड़ी संख्या उन मरीजों की होती है जिनके शरीर में गांठ या कैंसर की आशंका होती है। महिला रोग विभाग में भी स्तन में गांठ की शिकायत लेकर कई मरीज आते हैं। नाक, कान, गला और दंतरोग विभाग में भी कैंसर संभावित मरीज पहुंचते हैं। जांच सुविधा न होने के कारण इनका सही निदान संभव नहीं हो पाता और डॉक्टरों को अनुमान के आधार पर दवा लिखनी पड़ती है, जो मरीजों के लिए घातक साबित हो सकती है।
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कॉलेज में लगातार सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। पैथोलॉजी विभाग में मशीनें बढ़ाई जा रही हैं। बायोप्सी की सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। - प्रो. एसके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।