अनपरा परियोजना में अधिकारियों के आवागमन के लिए संविदा पर लगाए गए वाहनों के किराए का चार-पांच माह से भुगतान न होने से खफा संचालकों ने शुक्रवार को वाहनों का परिचालन ठप कर दिया। बस स्टैंड के पास प्रदर्शन कर भुगतान की आवाज भी उठाई। इसके चलते अनपरा, बी और डी तीनों परियोजनाओं मे तैनात अधिकारियों को कार्यस्थल पर जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। कोई अपने निजी वाहन तो कोई दूसरे से लिफ्ट लेकर पहुंचा।
जटाशंकर दूबे, पंपू पांडेय, श्रीराम यादव, मनोज सिंह, चक्रलाल वर्मा, गोपाल प्रसाद, शेषमणि सिंह आदि वाहन स्वामियों और चालकों का कहना था कि अगस्त से लेकर अब तक लगभग पांच माह गुजर गए हैं लेकिन अब तक एक रुपये का भुगतान नहीं किया गया है इससे उनके समक्ष फाकाकशी की नोबात आने लगी है। कहा कि डीजल वाहन संचालकों को देना पड़ता है। प्रत्येक तीन माह पर परमिट टैक्स, चालक का मानदेय, अनुरक्षण आदि के व्यय भी स्वयं वहन करने पड़ते हैं। ऐसे में मासिक किराए का भुगतान न किए जाने से आर्थिक तंगी की स्थिति उत्पन्न हो गई। आदि ने बताया कि कार और बोलेरो का अलग-अलग रेट है।
चालक कुशल श्रमिक माने जाते हैं, ऐसे में उन्हें 350 रुपये रोजाना मेहनताना देना पड़ता है। चूंकि अधिकांश चालक ही वाहन स्वामी हैं, ऐसे में उनके समक्ष रोजी-रोजगार का दूसरा जरिया भी नहीं है। पेट्रोल पंप संचालकों ने भी डीजल उधार देना बंद कर दिया है। ऐसे में अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वह लोग बेमियादी हड़ताल का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य हो जाएंगे। रामअनुज, श्यामलाल, विजय बहादुर यादव, जयराम, केआर शुक्ल, विनोद कुमार, अजय राय, दयाराम दहिया, मनोज दूबे, संजय आदि मौजूद थे।