प्रदेश के 5 एक्सप्रेसवे पर टोल की दरें
सबसे कम टोल पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर है। यहां पर प्रति किलोमीटर करीब दो रुपये भुगतान करना पड़ता है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर 2.15 रुपये, लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर 2.24 रुपये, गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे पर कार, जीप जैसे छोटे वाहनों को 2.50 से 2.60 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से टोल चुकाना पड़ता है।
ये है हाईवे की स्थिति
तस्वीर 1: उरमौरा में 100 मीटर तक सड़क घंसी, दो महीने पहले हुई थी मरम्मत
हाईवे की पश्चिमी लेन की मरम्मत दो महीने पहले कराई गई थी। उरमौरा में डायट के सामने करीब 100 मीटर तक सड़क धंस गई है। फ्लाईओवर से पहले तक छोटे-छोटे हिस्सों में सड़क धंसी है। फ्लाईओवर से नीचे उतरते ही चंडी तिराहे के पास आधा ब्रेकर चपटा हो चुका है। इसी के बगल में सड़क उखड़ने से वाहन चालक लड़खड़ा जाते हैं। पूर्व में यहां कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसी ही स्थिति हाईवे की पूर्वी लेन की है।
तस्वीर दो : डेढ़ किलोमीटर में 25 से ज्यादा गड्ढे, तीन अवैध कट भी
मधुपुर से कम्हरिया के बीच डेढ़ किलोमीटर में 25 से ज्यादा गड्ढे हैं। जगह-जगह सड़क धंसने के बाद डामर को कटिंग कर समतल करने के कारण बनी फिसलन वाली लाइनों पर बाइक सवार असंतुलित होकर चोटिल हो रहे हैं। कम्हरिया गांव के समीप पुलिया पर आधे हिस्से में तीन माह पूर्व बैरिकेडिंग कर छोड़ दिया गया है। मधुपुर उत्तरी तिराहे, कम्हरिया और अमौलिया गांव में डिवाइडर तोड़ कर अवैध कट बना लिए गए हैं। कुछ जगहों पर बरसात शुरू होने पर नए सिरे से एक लेन डामरयुक्त गिट्टी डाली गई थी। गिट्टी उखड़ने से वहां फिर गड्ढे बन गए हैं।
तस्वीर तीन : ब्रेकर से सफेद पट्टी गायब, संकेतक भी नहीं
हाईवे पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए बनाए गए ब्रेकर मानक के अनुरूप नहीं हैं। ब्रेकर से ठीक पहले सफेद पट्टी ज्यादातर जगहों पर नहीं है। संकेतक भी नहीं लगे हैं। इससे तेजी से आ रहे वाहन सवार ब्रेकर पर उछल जाते हैं। डाला चढ़ाई स्थित बंद खनिज बैरियर के पास कट पर संकेतक ठीक चौराहे पर लगा है, जबकि इससे कुछ पहले ही होना चाहिए। वाहन चालक की नजर तब पड़ती है, जब वह चौराहे पर पहुंच जाते हैं। पटवध, चोपन, तेलगुड़वा, डाला में बाइक निकलने के लिए लोगों ने अवैध कट बना लिए हैं। इसे बंद नहीं कराया गया।
तस्वीर चार : एक साल से बंद है लेन, मरम्मत भी शुरू नहीं
डाला में वैष्णो मंदिर के सामने हाईवे की एक लेन को बड़े वाहनों के लिए बंद कर दिया गया है। इसकी मरम्मत कराई जानी है, मगर एक साल बाद भी अब तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो पाया है। नतीजतन भारी वाहन मंदिर के बाहर से गुजरते हैं। ओवरलोड वाहनों की आवाजाही से यह लेन भी कई जगह दब गई है। इससे आम राहगीरों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा खतरे में है।
लोगों ने बयां की पीड़ा
सड़क की मरम्मत के नाम पर काम चलाया जा रहा है। बीच सड़क बने गड्ढे खतरनाक हैं। अचानक सामने गड्ढा आने पर बाइक चालक बचने के लिए दाएं या बाएं मुड़ जाते हैं तभी पीछे से आ रहे दूसरे वाहन की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है। -नवीन कुमार सिंह, मधुपुर
कटिंग कर समतल बनाई गई सड़क जानलेवा है। इस पर संतुलन बनाए रखना किसी भी वाहन चालक के लिए आसान नहीं है। अचानक गति से आ रहे वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं। ज्यादा टोल देने के बाद भी अच्छी सड़क न मिलना दुखद है। -मनोज कुशवाहा, लोहरा
अधिकारी बोले
हाईवे की मरम्मत का कार्य नियमित रूप से चलता रहता है, जहां भी सड़क टूटी है या खराब है, उसे सही कराया जा रहा है। जरूरत के अनुसार जगह-जगह संकेतक और सुरक्षात्मक कार्य भी कराए गए हैं। डाला में रेलवे से अनुमति न मिलने के कारण मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है, जहां तक टोल की दरों का सवाल है तो वह उपसा के माध्यम से निर्धारित मानकों पर तय होता है। उसी अनुसार प्रति वर्ष वृद्धि भी होती है।
-नीरज सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक, एसीपी टोल प्लाजा