तब अगोरी स्टेट पर राजा मोलाभागत का शासन था। बेहद क्रूर और अत्याचारी शासक माने जाने वाले मोलाभागत की अपने राज्य की मंजरी पर गलत निगाह थी। राजा के मंसूबों से वाफिक मंजरी के पिता मेहर को जब बेटी के प्रेम के बारे में पता चला तो उन्होंने तुरंत वीर लोरिक को विवाह करने को कहा।
पत्थर की अमर निशानी सुनाती है लोरिक और मंजरी की प्रेम कहानी
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बलिया से बरात सोन नदी के तट तक आ गई। राजा मोलाभागत ने उन्हें रोकने का भरपूर प्रयास किया लेकिन युद्ध के बाद लोरिक अगोरी किले तक पहुंचने में कामयाब रहे। राजा और उसकी सेना युद्ध में मारी गई। मंजरी की विदाई कराकर लोरिक लौटने लगे।
बरात जब मारकुंडी पहाड़ी पर पहुंची तब मंजरी ने अपने पति के अपार और शौर्य को चुनौती देते हुए प्रेम की कोई ऐसी अमर निशानी बनाने को कहा जिसे लोग वर्षों तक याद रखें। रहे। मंजरी की इच्छा पर वीर लोरिक ने अपनी तलवार के एक वार से ही पहाड़ी पर एक विशाल चट्टान को मध्य से चीर दिया।
यह विशाल चट्टान आज भी वहां मौजूद है। वीर लोरिक पत्थर के नाम से चर्चित यह स्थल प्रेम करने वालों के बीच काफी लोकप्रिय है। वेलेंटाइंस डे पर जब प्रेमी युगल अपने प्रेम का इजहार करते हैं तो अपने सच्चे प्रेम को प्रदर्शित करने के लिए इसका उदाहरण देना नहीं भूलते।
वीर लोरिक के बारे में जानकारी
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हाईवे पर मारकुंडी घाटी में निर्मित वीर लोरिक पत्थर के पास वीर लोरिक की विशाल प्रतिमा भी स्थापित है। प्रति वर्ष गोवर्धन पूजा पर यहां भव्य कार्यक्रम होता है। यादव समाज के लोग दूरदराज से यहां पहुंचते हैं और पूजन में हिस्सा लेते हैं। माना जाता है कि लोरिक भी यदुवंशी थे। मेले के दौरान भंडारा और बिरहा का मुकाबला भी होता है।