बताया कि महंगी होती पढ़ाई उनके वश की बात नहीं, लेकिन इस उम्मीद के साथ वह बच्चों को पढ़ा रहे हैं ताकि उनका भविष्य हमारे जैसा न रहे। बच्चे जब भी फीस, कॉपी, कलम, किताब के लिए पैसे मांगते हैं तो हमें सोचना पड़ जाता है, मगर अब बेटी की सफलता ने सारी शंकाएं दूर कर दी हैं। जितना सामर्थ्य रहेगा, उसे खूब पढ़ाएंगे।
बेटी की सफलता से गदगद मां ने कहा कि उन्होंने कभी भी बेटी पर घरेलू कार्यों का भार नहीं सौंपा। उसे पूरी तरह पढ़ाई करने की छूट दी। आज उसकी कामयाबी से मन को तसल्ली मिली है। ममता ने बताया कि पढ़ाई के दौरान जब कोरोना काल में स्कूल बंद था, तब ऑनलाइन पढ़ाई होती थी।
मेरे घर में एंड्रायड फोन नहीं होने के कारण पड़ोसियों के वाट्सएप नंबर पर पाठ्य सामग्री मंगाती और उसे फिर देखकर पढ़ती। कई बार सवाल समझ नहीं आते तो जियो के छोटे फोन में यूट्यूब पर देखती। ममता डॉक्टरों की सेवा भावना से प्रभावित हैं। वह आगे डॉक्टर बनना चाहती है।
इंटर की टॉपर खुशी केशरी भी पढ़ने में शुरू से मेधावी रही है। स्कूल से घर आने के बाद वह देर रात तक पढ़ती रहती। बेटी की मेहनत देख पिता गोविंद केशरी को यह भरोसा था कि अच्छा प्रदर्शन करेगी। स्कूल के शिक्षक भी बेटी प्रतिभा की सराहना करते रहते। गोविंद ने बताया कि स्कूल टॉप करने का अनुमान था, लेकिन बेटी ने जिला टॉप कर लिया। रिजल्ट आने के बाद से ही सीना फख्र से चौड़ा हो गया है। गोविंद की पांच संतानों में खुशी तीसरे नंबर पर है। उनसे बड़ी दो बहनें और दो छोटे भाई हैं। मां रीता गृहिणी हैं।