कोयले की किल्लत के कारण ताप परियोजनाओं पर संकट आया तो सिस्टम कंट्रोल की ओर से जल विद्युत संयंत्रों को तत्परता से संचालित करने का फरमान जारी कर दिया गया। एक अक्तूबर से रिहंद हाइड्रो से निरंतर बिजली का उत्पादन किया जा रहा है।
जल विद्युत गृहों को अमूमन बिजली की मांग बढ़ने पर चलवाया जाता है। इस समय प्रदेश में बिजली की मांग लगातार घटाव पर है। इसके बाद भी प्रदेश की कई इकाइयों के बंद होने व कई के क्षमता से कम लोड पर संचालित करने से विद्युत उत्पादन में गिरावट आई है। इसके बाद भी जल विद्युत संयंत्रों को लोड पर रखा गया है। रिहंद हाइड्रो के एक्सईएन ओएंडएम एसके राय ने बताया कि एक अक्तूबर से लगातार टरबाइनों को कभी कम तो कभी अधिक चलाया जा रहा है। पिछले तीन दिनों में ही जल विद्युत से 7.5 मिलियन यूनिट विद्युत का उत्पादन किया जा चुका है। सोमवार को दिन में दो टरबाइनों से 97 मेगावाट उत्पादन किया गया। शाम को मांग बढ़ने पर सभी टरबाइन चलाए जाते हैं।
बिजली की मांग में गिरावट का क्रम जारी
प्रदेश में बिजली की मांग में गिरावट का क्रम जारी है। सोमवार सुबह तक बिजली की अधिकतम मांग 300 मेगावाट कम होकर 18474 मेगावाट पहुंच गया। इस दौरान न्यूनतम मांग 10022 मेगावाट रही। अनपरा परियोजना की सभी इकाइयों के फुल लोड पर संचालित होने से निगम का उत्पादन तीन हजार मेगावाट से अधिक बना रहा।