अनपरा। सरकार प्रदेश में बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के दावे कर रही है, लेकिन ऊर्जा नगरी के संयुक्त चिकित्सालय में एक भी सर्जन डॉक्टर नही होने के कारण यह रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। सरकार की कमी का फायदा झोपाछाप डॉक्टरों को हो रहा है। निजी अस्पताल भी मरीजों की जेब ढीली करने में कोई कसर नही छोड़ रहें हैं।
अनपरा नगर के डिबुलगंज में जिला अस्पताल की क्षमता वाला 100 बेड का संयुक्त चिकित्सालय का निर्माण शासन की ओर से कराया गया है, लेकिन उपेक्षा के कारण यह अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। वर्तमान में अस्पताल में चार एमबीबीएस, दंत चिकित्सक और एक संविदा पर आयुष चिकित्सक की तैनाती की गई है, लेकिन अस्पताल को एक भी सर्जन नहीं है। इस कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। औद्यौगिक नगरी होने के कारण यहां सबसे ज्यादा मरीज दुर्घटना में घायलों के आतें हैं। घायल मरीजों के लिए सिर्फ यहां प्राथमिक उपचार की व्यवस्था है। अगर मरीज की हड्डी टूटी है या अन्य कहीं गंभीर चोटें हैं तो सीधा जिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। इसके साथ ही अस्पताल में हड्डी के डॉक्टर ही नही है। हड्डी से संबंधित मरीजों को मध्य प्रदेश या फिर 100 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। समय पर न पहुंचने पर मरीजों को कई चक्कर में मरीजों का इलाज हो पाता है।
दांत और आंख के डॉक्टर हैं लेकिन उपकरण नहीं
अस्पताल में दांत एवं आंख के डॉक्टर है लेकिन उन्हे ईलाज के लिए उपकरण ही नही है। इस कारण अस्पताल में आंख एवं दांत के आने वाले मरीजों को बिना इलाज के ही वापस जाना पड़ता है। दांत के ईलाज के लिए डेंटल चेयर है, लेकिन लंबे समय से डॉक्टर की तैनाती नही होने के कारण बिना इस्तेमाल के ही मशीन खराब हो गई। अब डॉक्टर की तैनती हुई है, लेकिन डेंटल चेयर खराब होने के कारण दांत के मरीजों को बिना ईलाज के ही वापस लौटना पड़ता है। विभाग ने नई डेंटल चेयर देने की बात कही थी, लेकिन अभी तक आई ही नही। आंख के ईलाज के लिए भी कोई उपकरण अस्पताल को नही दिए गए हैं। डॉक्टर मरीजों को सिर्फ दवा देतें हैं।
महिला एवं बाल रोग विशेषज्ञ भी नहीं
सरकार गर्भवती महिलाओं को भी बेहतर इलाज की सुविधा प्रदान करने का दावा करती है, लेकिन संयुक्त चिकित्सालय में महिला रोग विशेषज्ञ नही होने के कारण गर्भवती महिलाओं के साथ अन्य महिलाओं को ज्यादा परेशानी होती है। सबसे ज्यादा समस्या गर्भवती महिलाओं को होती है। अस्पताल में सामान्य जांच व ईलाज हो जाता है, लेकिन जब सीजेरियन प्रसव की बात आती है तो अस्पताल से महिलाओं को रेफर दिया जाता है। साथ ही अन्य बीमारीयाें में भी महिलाओं को निजी व जिला अस्पताल की ओर रूख करना पड़ता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर भी नही है। सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने बताया कि डॉक्टरों के रिक्त पद पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।