ठंड में नवजात और बच्चों में निमोनिया, बुखार, कोल्ड डायरिया का खतरा बढ़ गया है। रोजाना बड़ी संख्या में बच्चे गंभीर हालत में मेडिकल काॅलेज अस्पताल पहुंच रहे हैं। इन बच्चों के इलाज के लिए जिले के किसी अस्पताल में एनआईसीयू (नीकू) व पीडियाट्रिक आईसीयू (पीकू) उपलब्ध नहीं हैं।
ऐसे में इलाज के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। एसएनसीयू में भी पर्याप्त सुविधाएं नदारद हैं। जिला मुख्यालय में मेडिकल काॅलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल और परिसर में ही संचालित एमसीएच विंग में पूरे जिले से गर्भवती महिलाएं इलाज के लिए पहुंचती हैं।
समय से पहले प्रसव और कमजोर बच्चों के स्वास्थ्य समस्याएं होने पर जिला अस्पताल व एमसीएच विंग में 12-12 बेड का एसएनसीयू स्थापित है। 28 दिन तक के गंभीर बच्चों की देखभाल, इलाज के लिए नवजात गहन देखभाल इकाई (एनआईसीयू) की आवश्यकता होती है, लेकिन जिले के किसी भी अस्पताल में एनआईसीयू नहीं है।
इसके अभाव में नवजात शिशु को हायर सेंटर वाराणसी रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल काॅलेज अस्पताल में ही एक साल में 103 नवजातों की मौत हो चुकी है। वाराणसी रेफर होने वाले नवजातों का कोई स्पष्ट विवरण दर्ज नहीं होता है। एनआईसीयू न होने से यहां वेंटिलेटर की सुविधा भी नहीं होती है, जिससे गंभीर स्थिति में इलाज मिल सके।
नवजात और अन्य बच्चों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर संबंधितों को निर्देशित किया गया है। अस्पताल में संसाधनों की बढ़ोतरी और पहले से उपलब्ध संसाधनों को सक्रिय करने को लेकर जरूरी पहल की जा रही है।
-प्रो.एसके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल काॅलेज।