सोनभद्र। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष आषाढ़ में माकूल बारिश नहीं हुई है। जल संरक्षण के लिए खोदे गए तालाब प्यास ही रह गए हैं। बांध-बंधियों के जलस्तर में भी इजाफा नहीं हुआ है। प्यासे तालाबों को अब सावन में लबालब होने की आस है।
पर्याप्त बारिश न होने से किसान खेतों की सिंचाई को लेकर चिंतित हैं। हालांकि जिले के ही कुछ क्षेत्रों में बारिश अच्छी भी हुई। चुर्क क्षेत्र के आसपास आंकड़ों में वर्षा का स्तर पिछले साल से अधिक है। मानसून इस बार समय से पहले आ गया था। जून के दूसरे और तीसरे सप्ताह में तो अच्छी बारिश हुई, लेकिन उसके बाद से बादलों की आंख मिचौली जारी है। बड़े भौगोलिक क्षेत्रफल वाले जिले के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है तो ज्यादातर इलाके बारिश की राह ताकते रह गए। इसके चलते पोखरा, तालाब, बांध सब खाली हैं।
रिहंद बांध, धंधरौल बांध, नगवां बांध, बलुई बंधी का जलस्तर पिछले वर्ष के बराबर भी नहीं आ पाया है। नगर क्षेत्र को पानी देने वाले भेलाही बंधी में भी घटता जलस्तर चिंता बढ़ा रहा है। मौसम विशेषज्ञ इसे वातावरण में बदलाव का कारण बता रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र तिसुही के मौसम वैज्ञानिक विनीत यादव ने बताया कि इस साल क्लाइमेट चेंज के असर से एक सामान बारिश नहीं हुई है। सामान्य तौर जब बारिश होती है तो चौतरफा एक समान या एक-दो दिन आगे फिर बारिश क्षेत्र में समान रूप से होती है। इस साल बारिश का वितरण सही नहीं हो रहा है। इस वजह से किसी क्षेत्र में तेज बारिश हो रही है तो किसी क्षेत्र में हल्की बारिश भी नहीं हो पा रही। इस नाते किसानों का चिंतित होना स्वाभाविक है। हालांकि सूखे जैैसी संभावना नहीं है।
चुर्क में इस बार अच्छी बारिश
कृषि विज्ञान केंद्र तिसुही से जारी आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल की तुलना में इस साल चुर्क व आसपास के क्षेत्रों में जुलाई माह में अब तक 37 मिली मीटर अधिक बारिश हुई है। मौसम वैज्ञानिक विनीत यादव के मुताबिक पिछले साल जुलाई माह में चुर्क क्षेत्र में 203 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इसके सापेक्ष इस साल अब तक 240 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। वहीं जून में हुई बारिश के आंकड़ों को देखें तो पिछले साल 297 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जबकि इस साल इसके सापेक्ष महज 189.8 मिमी ही बारिश हुई। यानी जून में पिछले साल की तुलना में 107 मिलीमीटर कम बारिश हुई।