पूर्ण रूप से राख बांध पर निर्मित देश की पहली परियोजना अनपरा डी का दृश्य।
शुुरुआती उत्पादन के कुछ दिन बाद से ही बंद चल रही अनपरा डी की पांच सौ मेगावाट वाली पहली इकाई को मंगलवार की दोपहर 12.26 बजे सफलतापूर्वक सिंक्रोनाइज (उत्पादन) कर लिया गया। परियोजना की दूसरी इकाई पहले ही उत्पादन पर ली जा चुकी है। इसी के साथ प्रदेश की जनता को अनपरा डी से एक हजार मेगावाट बिजली मिलने का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया। तपिश में बढ़ती बिजली की जरूरत को देखते हुए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है।
सीएम अखिलेश यादव ने गत 31 मार्च 2015 को राख बांध पर बनी देश की पहली परियोजना की पहली इकाई का लोकार्पण किया था। उस दौरान जून तक इकाई को पूर्ण क्षमता से उत्पादन पर लेकर कामर्शियल लोड दे देने की उम्मीद जताई गई थी। छह जून को इकाई पूर्ण क्षमता से उत्पादन पर आ भी गई लेकिन अचानक से ब्वायलर में आई बड़ी दिक्कत ने सारे किए-कराए पर पानी फेर दिया। टरबाइन में कंपन की शिकायत भी हड़कंप मचाने वाली रही। स्थिति को देखते हुए अगस्त में इकाई को लंबे समय के लिए बंद रख नए सिरे से अनुरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। ब्वायलर की एक-एक ट्यूब बदलने के बाद माह भर पूर्व इकाई को लाइटअप करने की प्रक्रिया शुरू की गई। एसिड क्लिनिंग, स्टीम डंपिंग आदि की प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीन दिन पूर्व इकाई को उत्पादन के लिए लाइटअप भी कर लिया गया था।
मंगलवार को अनपरा परियोजना के जीएम इं. एके सिंह, भेल के अनपरा डी निर्माण प्रबंधक इं. आरके श्रीवास्तव की अगुवाई वाली टीम ने इकाई को सिंक्रोनाइज कर बिजली उत्पादन शुरू कर दिया। दोनों अधिकारियों ने बताया कि इकाई को फिलहाल सौ मेगावाट पर चलाया जा रहा है। बुधवार से धीरे-धीरे लोड बढ़ाया जाएगा। 17 अप्रैल तक इकाई से पूर्ण क्षमता से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।