ओबरा (सोनभद्र)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कानपुर से ओबरा-सी परियोजना की 660 मेगावाट क्षमता की पहली इकाई का लोकार्पण किया। वर्चुअल माध्यम से हुए लोकार्पण समारोह का ओबरा के गांधी मैदान में सजीव प्रसारण किया गया। इस यूनिट के शुरू होने से यूपी की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह इकाई प्रतिदिन लगभग 158 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन करेगी। इसकी लागत महज पांच रुपये प्रति यूनिट होगी।
इस दौरान ओबरा परियोजना के गौरवशाली अतीत और सुनहरे भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई। नई परियोजनाओं के संचालन से ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पहले की तरह फिर से ओबरा की भूमिका मजबूत होने की उम्मीद जताई गई। करीब 6502 करोड़ रुपये से ओबरा-सी की पहली इकाई का निर्माण दक्षिण कोरिया की दुसान कंपनी ने किया है। इसे पूरा करने में कंपनी को सात साल लगे हैं। लोकार्पण समारोह में ओबरा तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक इं.आरके अग्रवाल ने कहा कि यह दिन हमारे लिए गर्व, उत्साह और आशा से भरा हुआ है। यह एक सपने की शुरुआत है। वह सपना, जिसमें उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से सोनभद्र जनपद को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और अग्रणी बनाने का संकल्प छिपा है। यह सिर्फ ओबरा या यूपी ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि पहली इकाई के लोकार्पण के साथ यूपी की उत्पादन क्षमता में दस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यहां सस्ती बिजली बनेगी, जिससे राज्य को पावर एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीदने की आवश्यकता कम होगी। ओबरा सी परियोजना की 660 मेगावाट क्षमता की दूसरी इकाई का व्यावसायिक उत्पादन (सीओडी) जल्द प्रारंभ कर लिया जाएगा। ओबरा सी परियोजना सिर्फ ईंट और सीमेंट से बनी एक संरचना नहीं है, बल्कि यह हमारे राज्य की ऊर्जा क्रांति का प्रतीक है।
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सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित है परियोजना
ओबरा सी परियोजना सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित है। इसकी इकाइयों में जीई के माध्यम से महत्वपूर्ण उपकरणों टरबाइन एवं आक्जीलरीज, ईएसपी, स्विचयार्ड, ट्रांसफार्मर आदि की स्थापना की गई है। परियोजना में स्टीम को ठंडा करने के लिए क्लोज साइकिल सीडब्ल्यू वाटर सिस्टम लगाया गया है, जिससे पानी की बचत होगी। इकाइयों में डीएम वाटर का निर्माण नवीनतम तकनीकों पर आधारित डीएम प्लांट आयन एक्सचेंज एवं कोल हैंडलिंग प्लांट थायसन कूप के जरिये किया गया है। परियोजना में पर्यावरणीय मानकों का विशेष ध्यान रखते हुए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली, फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन और सिलेक्टिव कैटलिटिक रिडक्शन तकनीक अपनाई गई है।
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कब-कब, क्या हुआ
परियोजना का ईपीसी अनुबंध 22 दिसंबर 2016 को हुआ, जबकि निर्माण कार्य 2017 में शुरू हुआ। सभी चुनौतियों के बीच परियोजना की पहली इकाई बॉयलर हाइड्रो टेस्ट नवंबर 2020, बॉयलर लाइटअप अप्रैल 2022, ऑयल सिंक्रोनाइजेशन अप्रैल 2023 और ग्रिड से समकालन 25 अगस्त 2023 को किया गया। इसके बाद 26 दिसंबर 2023 को इस यूनिट ने अपनी 660 मेगावाट की पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन शुरू किया। नौ फरवरी 2024 से इस यूनिट का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हुआ।
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कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
लोकार्पण समारोह को सूबे के समाज कल्याण राज्य मंत्री और ओबरा विधायक संजीव गोंड, राज्य विद्युत उत्पादन निगम के निदेशक तकनीकी अश्विनी त्रिपाठी ने भी संबोधित किया। इस मौके पर डीएम बद्रीनाथ सिंह, एडीएम सहदेव मिश्रा, एएसपी त्रिभुवन नाथ तिवारी, जिलाध्यक्ष भाजपा नंदलाल गुप्ता, महाप्रबंधक (प्रशासन) एसएन मिश्र, महाप्रबंधक (कोयला संचालन) वाईके गुप्ता, महाप्रबंधक (ब) राज कुमार रहे। महाप्रबंधक (सी) एसके सिंघल, महाप्रबंधक (जानपद) दिवाकर स्वरूप, अधीक्षण अभियंता एके राय, मणि शंकर राय, एक्सईएन सदानंद यादव, एसडीएम विवेक सिंह, सीओ हर्ष पांडेय आदि मौजूद रहे। संचालन संदीप मिश्रा व अनुराग मिश्रा ने किया।