सोनभद्र। एनजीटी के आदेश पर खनन कार्य रोके जाने से डाला-बिल्ली खनन क्षेत्र में खलबली मची हुई है। खनन कारोबारी इससे राहत पाने की कोशिश में जुट गए हैं। फिलहाल उनकी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई से है। शुक्रवार को बैठक कर कोर्ट में मामले की मजबूती से पैरवी करने की रूपरेखा बनाई गई।
डाला-बिल्ली खनन क्षेत्र में स्थित कुल 24 में से 22 पट्टों से खनन कार्य को बृहस्पतिवार की रात 12 बजे से प्रतिबंधित कर दिया गया है। खनन विभाग की ओर से इसका नोटिस पट्टाधारकों को उपलब्ध कराया गया है। इसके बाद से ही खनन कारोबारी सकते में हैं। प्रतिबंध के पीछे राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईईआईए या सिया) से पर्यावरणीय स्वीकृति न मिलने को कारण बताया गया है। पहले यह स्वीकृति जिला स्तर पर ही मिल जाती थी। अब एनजीटी के नए आदेश में राज्य स्तर पर स्वीकृति अनिवार्य किया गया है। तय समय सीमा में सिर्फ दो पट्टा संचालक ही स्वीकृति प्राप्त कर सके थे। ऐसे में अन्य 22 पट्टों से खनन कार्य रोक दिया गया है। इसे लेकर शुक्रवार को डाला-बिल्ली क्रशर ऑनर्स एसोसिएशन ने बैठक की। इसमें पूरे मामले पर चर्चा के बाद सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पैरवी का निर्णय लिया गया। साथ ही जिले से भेजी गई पत्रावली पर राज्य स्तर से शीघ्र अनुूमति के लिए पैरवी पर सहमति बनी। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने बताया कि 12 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। इसमें संगठन मजबूती से अपना पक्ष रखेगा। राज्य स्तर पर लंबित अनुमति को भी शीघ्र प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।