ओबरा। प्रदेश सरकार के श्रम एवं सेवायोजन विभाग के मंत्री अनिल राजभर सोमवार की शाम बिल्ली मारकुंडी स्थित खदान में घटनास्थल पर पहुंचे। वहां राहत कार्य का जायजा लिया। उन्होंने घटना पर गहरा दुख जताते हुए पीड़ित परिवारों को श्रम विभाग से सभी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने की बात कही।
मंत्री ने एनडीआरएफ व एसडीआरएफ टीम की ओर से की जा रही कार्रवाई के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वह यहां पहुंचे हैं। खदान में हुए हादसे में जिन भी व्यक्तियों की मृत्यु हुई है, उनके परिजनों को शासन व श्रम विभाग की ओर से अनुमन्य सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि दुर्घटना में मृत व्यक्तियों के परिजनों को और पीड़ित परिजनों की हर संभव मदद की जाए। कहा कि खदान में हुई घटना में जिनकी भी लापरवाही मिलेगी, कठोरतम कार्रवाई होगी। इस मौके पर विधायक सदर भूपेश चौबे, एडीएम न्यायिक रमेश चंद्र, एसडीएम ओबरा विवेक सिंह आदि मौजूद रहे। उधर, राज्य आपदा प्रबंधन के उपाध्यक्ष योगेंद्र डिमरी ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्य का जायजा लिया।
सवा लाख-सवा लाख रुपये खाते में भेजे
श्रम मंत्री अनिल राजभर ने हादसे में मृत तीन मजदूरों के परिजनों को विभागीय योजना के तहत प्रारंभिक रूप से अलग-अलग 1.25 लाख रुपये की धनराशि दी गई। यह राशि खदान से सबसे पहले बाहर निकाले गए शव राजू गाेंड, इंद्रजीत यादव व संतोष यादव के परिजनों को दी गई। अन्य दो श्रमिकों से जुड़ी प्रक्रिया भी पूरी कराते हुए उन्हें ही सहायता राशि दी जाएगी।
घटना के लिए डीजीएमएस जिम्मेदार : धर्मवीर तिवारी
सोनभद्र। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर तिवारी ने कहा कि खनन हादसा सोनभद्र के लिए अत्यंत दुखद है। इतनी गहरी खदान होने के बाद भी डीजीएमएस ने किन परिस्थितियों में खनन कार्य होने के लिए अनुमति दी। ऐसे में घटना के लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार डीजीएमएस है। डीजीएमएस की ओर से बंद खदानों में भी एमएम-11 उठाया गया है। आखिर बंद खदानों में कैसे खनन हुआ? कहा कि 2012 में सपा की सरकार में अंधाधुंध खनन के कारण बड़ा हादसा हुआ था, लेकिन उससे सबक नहीं लिया गया।
खनन हादसे की न्यायिक आयोग से हो जांच : एआईपीएफ
म्योरपुर। बिल्ली मारकुंडी में हुए खनन हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट की जिला कमेटी ने खनन हादसे की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित न्यायिक आयोग से जांच कराने की मांग की है। एआईपीएफ के जिला संयोजक कृपाशंकर पनिका ने बताया कि अवैध खनन का कारोबार आज सिंडिकेट के हवाले हो गया है। यहां हो रहे खनन कारोबार के तार सभी सरकारों में मुख्यमंत्री कार्यालय तक जुड़े रहे हैं। इस खनन में माइंस सेफ्टी एक्ट का खुला उल्लंघन होता है। मानक से ज्यादा गहरा खनन कर भयंकर खाई बना दी गई है। कहीं भी एनजीटी के आदेश और पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं होता।