जिले मेें जमीन विवाद को जड़ से समाप्त करने और गरीबों को आसानी से बैंकों से कर्ज मुहैया कराने के लिए सरकार की स्वामित्व योजना के तहत 1110 गांवों में सर्वे पूरा हो चुका है। अब तक पांच हजार से अधिक लोगों को घरौनी वितरित भी कर दी गई है। योजना के लाभार्थी घरौनी पर कर्ज लेकर रोजगार भी कर सकते हैं।
जिले का अधिकांश क्षेत्रफल जंगल और पहाड़ों से आच्छादित होने के नाते भूमि विवाद ज्यादा है। विभिन्न न्यायालयों में सरकारी जमीनों पर कब्जे को लेकर हजारों मुकदमे चल रहे हैं। वहीं आबादी की जमीनों पर मकान बनाकर गुजर-बसर करने वाले बैंकों से कर्ज लेकर रोजगार तक नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनके पास मकान के कागजात उपलब्ध नहीं है। स्वामित्व योजना के तहत आबादी की भूमि के सर्वे का काम जिले में तेजी से चल रहा है, ताकि भूमि का चिह्नांकन कर उसके स्वामित्व की घरौनी का वितरण जल्द संबंधितों को किया जा सके। शासन के निर्देश पर ड्रोन से सर्वे की प्रक्रिया चल रही है। जिले की चार तहसीलों में कुल 1441 राजस्व गांव है, जिसमें 49 गैर आबाद गांव भी शामिल है। वहीं 184 गांवों में आबादी की जमीन एक इंच भी नहीं है। पांच गांव नगर पंचायत और नगर पालिका में शामिल हो गए है और 49 गांव चकबंदी प्रक्रिया के अधीन है। तीन गांव में विशिष्ट कारणों से सर्वे का कार्य नहीं होगा। इस वजह से 1131 गांवों के ही नवीनतम ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग से सरकारी भवन, स्कूल, अस्पताल, पुलिस स्टेशन, सामुदायिक भवन, व्यक्तिगत संपत्तियों, सरकारी संपत्ति, ग्रामसभा की भूमि, आदि की पहचान कर ऑनलाइन फीड किया जा रहा है। स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को कई फायदे मिलेंगे। इस योजना से लाभाविंत होने वाले व्यक्तियों को आसानी से उनकी हैसियत के अनुसार कर्ज भी ले सकेंगे।
जमीन विवाद को जड़ समाप्त करने और आबादी की जमीनों पर मकान बनाकर रह रहे लोगों को स्वामित्व का अधिकार देने के लिए स्वामित्व योजना शुरू की गई है। योजना से लाभांवित होने वाले व्यक्ति घरौनी दिखाकर बैंकों से रोजगार के लिए कर्ज भी ले सकते हैं। -राकेश सिंह, एडीएम।