रेणुकूट-बीजपुर मार्ग पर प्राइवेट बस की छत पर बैठकर सफर करते स्कूली बच्चे।
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बीजपुर। बीजपुर-रेनुकूट मार्ग पर चल रहीं डग्गामार बसों की छत पर सवार होकर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी डीएवी और केंद्रीय विद्यालय के बच्चे स्कूल जाते हैं। अंदर की सीट पर ठूंस-ठूंस कर मजदूर बैठाए जाते हैं। बच्चों को समय से स्कूल जाने की मजबूरी में बसों की छत पर बैठ कर यात्रा करना दिनचर्या हो गई है।
एनटीपीसी रिहंद परिसर में इंग्लिश मीडियम के तीन विद्यालय संचालित हैं। इन्हीं विद्यालयों में बभनी, चपकी, महुअरिया, बखरीहवा, जरहा, सेवकामोड, चेतवा आदि के काफी संख्या में गरीब ग्रामीण और पढ़ाई में अवल बच्चे किसी तरह अपना नामांकन करा कर भाग्य संवारना चाहते हैं। कोरोना के कारण साल भर बाद खुले विद्यालयों में पढ़ाई को छोड़ना मुनासिब न समझ कर किसी तरह ग्रामीण बच्चे आपाधापी में बसों की छत पर यात्रा कर रोज विद्यालय पहुंच रहे हैं। बताया जाता है कि परियोजना में काम पर श्रमिकों के पहुंचने और स्कूल में बच्चों के पहुंचने का समय लगभग एक है इसी लिए बसों में भीड़ के कारण मजदूर अंदर तो बच्चे छत पर सफर करने के लिए मजबूर हैं। डग्गामार बसों से सफर यह कितना सही और कितना गलत है इसका निर्धारण तो आरटीओ प्रशासन करेगा लेकिन ईश्वर कुछ ऐसा न करें कि कभी कोई हादसा हो तो निर्दोष की जान चली जाय। वैसे इस पर पुलिस प्रशासन को भी गम्भीरता से बिचार कर करवाई करनी चाहिए।
बसों की छत पर बच्चों को बैठाकर सफर कराए जाने से लोगों में असंतोष है। बीजपुर निवासी सुरेश गुप्ता का कहना है कि कई जगहों पर बिजली के तार सड़क पार कर रहे हैं। ऐसे में बच्चों की जान पर खतरा बना हुआ है। पुलिस को इस पर सख्ती से रोक लगाना चाहिए। चंद्रकुमार ने कहा कि बस में सफर करने वाले बच्चों से किराया कम मिलता है। लिहाजा चालक-परिचालक उन्हें छत पर बैठा देते हैं। निजी हित के लिए बच्चों की जान से खिलवाड़ पर कार्रवाई की जाना चाहिए।
बसों की छत पर यात्रा करना गैर कानूनी है। रेणुकूट-बीजपुर मार्ग पर बच्चों को छत पर बैठाकर चलने वालों बसों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जल्द ही औचक निरीक्षण करेंगे। -रामाशीष यादव, सीओ, दुद्धी।