स्वास्थ्य विभाग के लाख दावों के बावजूद गांवों में झोलाछाप की सक्रियता बनी हुई है। सोनभद्र के रेणुकापार के ग्राम पंचायत अगोरी में तीन बच्चों की मौत के पीछे भी इन्हीं झोलाछाप की लापरवाही सामने आई है। समय से बेहतर उपचार न मिलने की वजह से एक सप्ताह के अंदर तीन बच्चों ने दम तोड़ दिया। गांव में पहुंचे ओबरा तहसील के कानूनगो और लेखपाल की जांच में यह तथ्य सामने आया। राजस्व कर्मियों ने जांच रिपोर्ट एसडीएम और तहसीलदार को भेज दी है।
जुगैल के ग्राम पंचायत अगोरी के करजी, मुर्गीडड और गरदा टोले में अज्ञात बीमारी ने दस्तक दे दी है। गांव में दवा का छिड़काव और साफ-सफाई न होने से लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। शुक्रवार को करजी टोला निवासी संतोष (1) पुत्र गुड्डू और विनय (ढाई वर्ष) पुत्र रामसेनही की तबीयत खराब हो गई। घरवाले नजदीकी एक झोलाछाप के पास बच्चों को इलाज के लिए ले गए। रात में दोनों बच्चों की मौत हो गई। इसके पूर्व 13 सितंबर को विजय (8) पुत्र मुन्ना की बुखार से मौत हो गई थी। शनिवार को ग्राम प्रधान ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अज्ञात बीमारी से तीन बच्चों की मौत और कइयों के बीमार होने की सूचना दी तो खलबली मच गई।
डीएम अभिषेक सिंह के निर्देश पर सीएमओ ने स्वास्थ्य टीम भेजकर मरीजों का उपचार शुरू कराया। वहीं एसडीएम के निर्देश पर राजस्व कर्मियों की टीम ने बच्चों की मौत की जांच करने पहुंची। तहसीलदार सुनील कुमार ने बताया कि कानूनगो मो. आरिफ और लेखपाल सरजू यादव ने जांच कर रिपोर्ट दे दी है। राजस्व कर्मियों ने रिपोर्ट में लिखा है कि बच्चों की तबीयत खराब होने पर परिजन नजदीकी झोलाछाप से उपचार करा रहे थे। उपचार के दौरान बच्चों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंच कर मरीजों के इलाज में जुट गई हैं।