कलेक्ट्रेट सभागार में सेवाकुंज आश्रम के समर्पणपत्रिका का विमोचन करते जिले के प्रभारी मंत्री डॉ.
सोनभद्र। सेवा समर्पण संस्थान सेवाकुंज आश्रम संबद्ध अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के सेवाकुंज आश्रम कारीडांड चपकी द्वारा प्रकाशित समर्पण स्मारिका का विमोचन जिले के प्रभारी मंत्री व राज्य शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र ने कलेक्ट्रेट सभागार में मंगलवार को किया ।
उन्होंने कहा कि सरल शब्दों में समर्पण का अर्थ है अपने आपको मन व बुद्धि से पूर्णरूपेण किसी ऐसे ईष्ट को नि:स्वार्थपूर्वक सौंप देना, जिस पर पूर्ण श्रद्धा व विश्वास हो अथवा बिना किसी तर्क व संदेह किए बगैर किसी भी उपयोग हेतु ज्यों का त्यों स्वयं को किसी के हवाले कर देना। समर्पण में संदेह व तर्क की कोई गुंजाइश नहीं होती। सेवा समर्पण संस्थान के जेसी विमल सिंह ने कहा कि समर्पण में छल छिद्र व कपट का कोई स्थान नहीं होता। जिलाकार्य समिति सदस्य आलोक कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि योगी आदमी भगवान से योग लगाते हैं और अपने आप को पूर्ण समर्पित कर देते हैं तो वे सुख, शांति और परमात्मा का आनंद लेते हैं। जब तक समर्पण नहीं होता, तब तक सच्चा सुख नहीं मिलता। हरीशचंद्र त्रिपाठी ने कहा कि महाभारत युद्ध के दौरान अपने आपको स्वावलंबी समझ अर्जुन योगेश्वर श्रीकृष्ण भगवान के प्रति समर्पण को भूले तो धनुर्धारी अर्जुन के तीर चलने रुक गए। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अर्जुन का समर्पण भाव बना तो पुन: तीर चलने आरंभ हो गए।