सोनभद्र। सुदूरवर्ती इलाकाें में सौर ऊर्जा संयंत्र की मदद से बिजली पहुंचाने की योजना में बड़ी गड़बड़ियां हुई हैं। पांच साल की अनुरक्षण अवधि के वादे के साथ गांवों में लगवाए गए अधिकांश सोलर पैनल समय से पहले ही जवाब दे गए हैं। कहीं दो तो कहीं तीन साल में ही सौर ऊर्जा संयंत्र के खराब होने से ग्रामीणों की मुश्किल बढ़ गई है। कुछ लोग तो खुद से मरम्मत कराकर बिजली जला रहे हैं, मगर अधिकतर लोगों की रात अंधेरे में बीत रही है।
सौभाग्य योजना के तहत हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य है। जिन इलाकों में किन्हीं कारणों से तार, पोल लगाकर बिजली दे पाने में दिक्कत हैं। वहां सोलर संयंत्र के माध्यम से घरों को रोशन करने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत, उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण की ओर से शत-प्रतिशत अनुदान पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाए गए थे। जिले में वन विभाग की आपत्तियाें और दुरूह बसावट के कारण तार-पोल लगाने में आ रही दिक्कतों के मद्देनजर वित्तीय वर्ष 2021-22 में करीब 22 हजार घरों को रोशन करने के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाए गए थे। प्रत्येक संयंत्र पर 49 हजार रुपये का खर्च आया था।
इसकी संपूर्ण राशि विभाग की ओर से दी गई थी। दावा किया गया था कि पांच वर्ष तक यह काम करेगा। इस बीच कोई दिक्कत आती है तो संबंधित संस्थाएं ही इसकी मरम्मत भी कराएंगे। लाभार्थियों को सोलर पैनल, बैटरी, स्टैंड आदि दिया गया था। इससे घर में बत्ती, पंखा व अन्य छोटे बिजली उपकरण चलने थे। कुछ समय तक तो संयंत्र ठीक से काम करते रहे, लेकिन साल बीतने के बाद से वह बंद होते गए। वर्तमान समय में 40 प्रतिशत से ज्यादा सौर ऊर्जा संयंत्र लंबे समय से बंद पड़े हैं। लिहाजा इन घरों में अंधेरा पसरा हुआ है। जिला मुख्यालय से लंबी दूरी के चलते ग्रामीण शिकायत करने आ नहीं पाते और गाहे-बगाहे आए भी तो उनकी खराबी दूर करने में संस्थाएं रूचि नहीं दिखातीं।
तीन फर्मों को मिला था ठेका
सौर ऊर्जा संयंत्र उन इलाकों में लगने थे, जहां बिजली पहुंचाना संभव नहीं था। ऐसे क्षेत्र सबसे ज्यादा चोपन, कोन, म्योरपुर व घोरावल क्षेत्र में हैं। इन इलाकों के करीब 22 हजार घरों को शत-प्रतिशत अनुदान पर संयंत्र दिया गया था। यह कार्य तीन कंपनियों प्रीमियर इंडस्ट्रीज, लार्ड्स इंडस्ट्रीज और गौतम इंडस्ट्रीज ने मिलकर कराया था। नियमों के तहत पांच साल तक उन्हें इनके अनुरक्षण का भी ध्यान रखना था, यानि किसी तरह की खराबी पर मरम्मत कराने की शर्त थी। करीब डेढ़ से दो साल तक इसका पालन भी हुआ, मगर इसके बाद सभी संयंत्रों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
शिकायत की, पर बनवाने नहीं आया कोई
चोपन ब्लॉक के गुरमुरा निवासी देवीलाल, कैलाश, राघवेंद्र के घरों में लगे पैनल लंबे समय से खराब पड़े हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन बनाने कोई नहीं आया। झिरखोरी के रामप्यारे, पटिहवा के संजय, भोला, बंधू, बाबूलाल खरवार, जयप्रसाद, हथवानी के आलोक, रामसूरत के घरों में लगे सौर ऊर्जा संयंत्र भी बंद हैं। भवानी कटरिया के पतिराज, बिरजू, राजकुमार आदि का कहना है कि पहले कोटे की दुकानों से मिट्टी का तेल मिलता था तो ढिबरी-लालटेन भी जला लेते थे। अब वह भी बंद है। रात होने पर अंधेरा छा जाता है। कुछ लोगों ने खुद से नई बैट्री और पैनल की व्यवस्था की है, लेकिन यह सबके बस की बात नहीं।
गांवों में लगे सोलर स्ट्रीट लाइट भी खराब
गांवों में पथ प्रकाश के लिए सौर ऊर्जा से जलने वाले स्ट्रीट लाइट भी खराब पड़े हैं। कुछ वर्षों पहले ग्राम पंचायतों ने इस मद में खूब खर्च किया। सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर लंबा भुगतान कराया गया, मगर डेढ़-दो वर्षाें में ही अधिकांश लाइट बंद हो गए। कई बार इसकी जांच की मांग भी उठती रही है।
गांवों में लगे सौर ऊर्जा संयंत्र में जहां भी गड़बड़ी हुई है, उसकी जांच कराई जाएगी। अनुरक्षण अवधि में उनकी मरम्मत का कार्य संबंधित फर्म को करना है। अगर वह इसका पालन नहीं करते तो उनके विरुद्ध कार्रवाई भी होगी। - सौरभ गंगवार, सीडीओ