म्योरपुर। विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर तैयारियां अब तेज रफ्तार पकड़ चुकी हैं। प्रयागराज से छत्तीसगढ़ सीमा तक प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे के निर्माण की दिशा में अहम कदम उठाते हुए मृदा परीक्षण (सॉयल टेस्टिंग) का कार्य शुरू कर दिया गया है।
करीब 330 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को गाजीपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है, जिससे इसकी कुल लंबाई बढ़कर लगभग 450 किलोमीटर हो जाएगी। इस परियोजना के पूरा होने से पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।
दिल्ली की अल्मोंडज कंपनी ने एक्सप्रेसवे के रूट का सर्वे लगभग पूरा कर लिया है। सर्वे के बाद अब लखनऊ की अरुण सॉयल लैब की टीम अलग-अलग स्थानों पर अत्याधुनिक मशीनों की मदद से मिट्टी की गुणवत्ता और मजबूती की जांच कर रही है।
यह परीक्षण निर्माण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके आधार पर सड़क की डिजाइन, मजबूती और लागत तय की जाएगी। मंगलवार को मुर्धवा-बीजपुर मार्ग पर आश्रम मोड़ के पास प्रस्तावित ओवरब्रिज स्थल पर सॉयल टेस्टिंग का कार्य किया गया। इस दौरान साइड इंचार्ज मनोज कुमार के नेतृत्व में टीम ने जमीन में गड्ढे खोदकर मिट्टी के नमूने एकत्र किए।
इन नमूनों को विस्तृत जांच के लिए लखनऊ भेजा जा रहा है। टीम का कहना है कि डेढ़ से दो महीने के भीतर परीक्षण रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी। अरुण सॉयल लैब के प्रतिनिधि मनोज कुमार ने बताया कि परियोजना के लिए कुल 9 मशीनें लगाई गई हैं।
इनमें से चार मशीनें प्रयागराज, तीन मिर्जापुर और दो मशीनें सोनभद्र जिले में कार्यरत हैं। इन सभी मशीनों के माध्यम से निर्धारित समय सीमा के भीतर सॉयल टेस्टिंग का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, मृदा परीक्षण और अन्य तकनीकी व प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद विधानसभा चुनाव से पहले ही निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ सीमा तक एक्सप्रेसवे को विस्तारित करने के प्रस्ताव के बाद नए सिरे से रूट सर्वे भी कराया गया है।