सोनभद्र। जिले में बच्चों के टीकाकरण की निगरानी में लापरवाही बरती जा रही है। इससे जिले के करीब छह फीसदी बच्चे नियमित टीकाकरण से छूट गए हैं। ऐेसे में इन बच्चों के बीमारी की चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है।
बच्चों का निशुल्क टीकाकरण किया जाता है। इससे उनको डिप्थीरिया, टेटनस, काली खांसी, टीबी व खसरा, गलसुआ, रूबैला, निमोनिया, रोटावायरस, चिकनपॉक्स आदि गंभीर बीमारियों का सुरक्षा कवच मिल जाता है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से बच्चों के टीकाकरण में लापरवाही उजागर हो रही है। वर्ष 2024-25 में टीकाकरण का ग्राफ 94 फीसदी तक रहा। हालांकि आकड़ों पर गौर करें तो इस सत्र में शून्य से एक वर्ष तक के काफी बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गए। आंकड़ों के मुताबिक लक्ष्य 58924 के मुकाबले बीसीजी के टीकाकरण वाले बच्चों की संख्या 93.4 फिसदी यानी 54822 रही। जबकि ओपीवी-1 से लाभान्वित बच्चों की संख्या 54039 यानी 91.71 फीसदी है। पेन्टावेलेन्ट-1 से 91.71 से लाभान्वित बच्चों की संख्या 54037 है। ओपीवी-3 से लाभान्वित बच्चों की संख्या 50145 यानी 85.10 फीसदी है। पेन्टावेलेन्ट-3 से 85.17 से फीसदी बच्चे लाभान्वित हैं। एमआर-1 से लाभान्वित बच्चों की संख्या 55749 यानी 94.61 फीसदी है। एक से दो साल के बच्चों को लगने वाले एमआर द्वितीय डोज के आकड़े भी कुछ इसी तरह के हैं। 91.11 यानी 50800 बच्चों को ही टीका लगाया गया है। जबकि डीपीटी प्रथम बूस्टर 50515 बच्चों को लगा है। यह लक्ष्य का 90.60 फीसदी है। डीपीटी द्वितीय बूस्टर 41260 बच्चों को लगा है। यह लक्ष्य का 82.76 फीसदी है। इस तरह से नियमित टीकाकरण से अलग-अलग वर्ग में हजारों बच्चे कई टीकों की डोज से छूट गए हैं। ऐसे में कई बच्चों में संबंधित बीमारियां के होने की आशंका बढ़ गई है।
वर्जन:
टीकाकरण को लेकर लगातार अभियान चलाया जाता है। शत-प्रतिशत टीकाकरण के निर्देश दिए गए हैं। अभिभावकों को भी इसके प्रति जागरूक किया जाता है। - डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।