म्योरपुर विकासखंड की छह ग्राम पंचायतें परिसीमन की विसंगति का दंश झेल रही हैं। दुद्धी से नजदीकी के बावजूद ओबरा में शामिल किए जाने के चलते यहां का विकास प्रभावित है। भौगोलिक जटिलताओं के कारण नेताओं को इन गांवों की सिर्फ चुनाव में ही याद आती है। वहीं दूरी के कारण यहां के लोग भी अपने जनप्रतिनिधि तक पहुंचने में दुश्वारी झेलते हैं।
म्योरपुर ब्लाक के रनटोला, खैराही, डडीहरा, परनी, गंभीरपुर, किरवानी ग्राम पंचायत के लोगों को ओबरा विधानसभा क्षेत्र में होना काफी अखर रहा है। दुद्धी के नजदीक होने के बावजूद यह गांव ओबरा विधानसभा में शामिल हैं। पिपरी कानूनगो सर्किल होने की वजह से इन ग्राम पंचायतों को ओबरा में रखा गया। मुर्धवा मोड़ से म्योरपुर के रास्ते पर पड़ने वाली ग्राम पंचायतों में प्रतिनिधियों का आना बहुत कम ही होता है। इन ग्राम पंचायतों ओबरा तहसील में शामिल किए जाने का भी प्रस्ताव था लेकिन ग्रामीणों की आपत्ति के बाद कानूनगो सर्किल के इन गांव को छोड़ दिया गया। भौगोलिक दृष्टि की बात करें तो दुद्धी से इन गांवों की दूरी मात्र 18 से 20 किलोमीटर होगी जबकि ओबरा और चोपन की दूरी 40 से 50 किलोमीटर पड़ेगी। ऐसे में ग्राम पंचायतों के लोगों को विभिन्न कार्यों के लिए जनप्रतिनिधि तक पहुंचने में दिक्कत होती है। भौगोलिक जटिलता के कारण नेता भी सिर्फ चुनाव के समय वोट लेने ही यहां आते हैं। इस बार चुनाव में छह गांवों के लोग प्रत्याशियों से ढेरों सवाल करने का मन बनाए हुए हैं।