रेणुकूट/ओबरा। रिहंद जलाशय का जलस्तर कम न होने के कारण बृहस्पतिवार को भी बांध के सात गेट खुले रहे। इसके जरिए 70 हजार क्यूसेक पानी ओबरा बांध में बहाया जा रहा है। उधर, ओबरा बांध के भी सात गेट खुले हुए हैं। इससे 77 हजार क्यूसेक पानी निकलकर सोन नदी में जा रहा है। इससे सोन नदी का जलस्तर भी 169 मीटर तक पहुंच गया है। खतरे के निशान से नदी अभी दो मीटर नीचे है। लगातार 36 घंटे से गेट खुलने के बाद भी रिहंद का जलस्तर 869.2 फीट पर ही बना हुआ है।
रिहंद बांध का कैचमेंट एरिया मप्र और छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ है। इन राज्यों की बारिश से ही बांध भरता है। पड़ोसी राज्यों में लगातार हो रही तेज वर्षा के चलते बांध में भारी मात्रा में पानी आ रहा है। जलस्तर 869.2 फीट पहुंचने के बाद एहतियात के ताैर पर बांध के गेट बुधवार की सुबह खोले गए थे। पहले तीन गेट खोले गए और फिर शाम तक सात गेट खोलकर पानी निकाला जाता रहा। बृहस्पतिवार को भी बांध के सात गेट खुले रहे।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुशील कुमार सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह दो फाटकों को दो-दो फीट कम कर दिया गया। बाद में जलस्तर को देखते हुए तीन फाटकों को पांच-पांच फीट कम कर दिया गया। शेष चार फाटकों को 10 फीट खोलकर पानी निकासी की जा रही है। बांध के सात फाटकों को खोलकर व टरबाइन को चलाकर 70900 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। यह पानी सीधे ओबरा बांध में जा रहा है। पानी का दबाव बढ़ने के कारण ओबरा बांध के भी नौ में सात गेट खोल दिए गए हैं। ओबरा बांध से 77714 क्यूसेक पानी निकाला जा रहा है। यह पानी आगे चलकर सोन नदी में मिल रहा है। चोपन में सोन नदी के खतरे का निशान 171 मीटर है, जबकि वर्तमान में नदी 169.13 मीटर है। फिलहाल तीन सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से नदी में पानी घट रहा है।
बांध को देखने पहुंच रहे लोग
रेणुकूट। रिहंद बांध के गेट खुलने की खबर पाकर बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में लोग जलाशय की ओर पहुंचे। बांध के मुख्य गेट के साथ ही पुराने पुल और नए पुल पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ लगी रही। वह गेट खुलने का दृश्य देखते रहे और सेल्फी भी लेते रहे। भीड़ को देखते हुए पुल के आसपास कई दुकानें भी लग गईं।
बुलाई गई एसडीआरएफ की टीम
ओबरा। रेणु नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए एसडीआरएफ की टीम को ओबरा बुला लिया गया है। ओबरा प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए एहतियातन एसडीआरएफ के बाढ़ नियंत्रण दस्ते की 13 सदस्यीय टीम को बुलाकर अलर्ट पर रखा गया है। टीम को रेणु नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में पेट्रोलिंग के लिए निर्देशित किया गया है।