सोनभद्र। जिले में सरकारी धन के दुरुपयोग और बंदरबाट का पंचायत उद्योग बड़ा उदाहरण है। फ्लाई ऐश से ईंट बनाने के नाम पर डीएमएफ के चार करोड़ रुपये डूब गए तो लाखों रुपये खर्च कर स्थापित सेनेटरी पैड मेकिंग मशीन भी वर्षाें से धूल फांक रही है। इसके लिए खरीदा गया कच्चा माल और तैयार पैड भी गोदाम में डंप होकर खराब हो रहे हैं। पिछड़े और आदिवासी बहुल जिले की ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार के लिए यह बड़ा माध्यम हो सकता था, मगर जिम्मेदारों की उदासीनता से फिलहाल यह कबाड़ हो रहा है।
पंचायती राज विभाग से संचालित पंचायत उद्योग योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को शारीरिक स्वच्छता और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए नगर से सटे पकरी गांव में सेनेटरी पैड बनाने की मशीन स्थापित हुई थी। करीब 17 लाख रुपये रिवाल्विंग फंड देकर इसे शुरू कराया गया। महिलाओं ने हजारों पैड तैयार कर इसे बाजार में पहुंचाना भी शुरू किया, मगर कुछ महीनों बाद ही इस पर ताला लग गया। मौजूदा समय में पकरी गांव में प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र के बीच स्थित भवन में बंद लाखों रुपये से खरीदी गई मशीनें बर्बाद हो रही है। इसी भवन के एक हिस्से में हजारों तैयार पैड भी धूल मिट्टी के बीच खराब हाे रहे हैं। वर्षों से विभागीय जिम्मेदार इस उद्योग की ओर झांकने तक नहीं आए। प्रदेश में सबसे ज्यादा महिला स्वयं सहायता समूह गठन करने वाले जिले में महिलाओं को अलग-अलग रोजगार से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए उन्हें विभिन्न स्रोतों से फंड और मशीनें उपलब्ध कराए जा रही हैं। दूसरी ओर पंचायत उद्योग में लाखों रुपये से खरीदी गई मशीन कबाड़ में तब्दील हो रही है। इस उद्योग को पुर्नजीवित करने में रुचि नहीं है।
सेनेटरी पैड की मदद से चल रहा प्लास्टिक मुक्ति अभियान
जिले को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए मेरी प्लास्टिक-मेरी जिम्मेदारी अभियान चल रहा है। इसी के तहत रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के ऊंचडीह की प्रधान अर्चना त्रिपाठी की पहल चर्चा में है।दो किलो प्लास्टिक लाने पर प्रधान की ओर से महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड मुफ्त में दिया जा रहा है। प्रधान की इस पहल से जहां एक तरफ गांव प्लास्टिक मुक्त हो रहा है तो महिलाएं भी सेहत के प्रति जागरूक बन रही है। इस अभियान को नीति आयोग ने बेस्ट प्रैक्टिस में शामिल किया है। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से प्रकाशित स्वच्छता समाचार में इसे जगह मिली है। अन्य गांवों में भी इसे लागू करने में पंचायत उद्योग की सेनेटरी पैड मेकिंग मशीन मददगार बन सकती है।
बंद हैं पंचायत उद्योग तो फिर रिकॉर्ड में नहीं
पंचायती राज विभाग की ओर से पूरे प्रदेश में 92 पंचायत उद्योग की स्थापना की गई है। हाल ही में विभाग ने बंद पड़े 65 उद्योगों की सूची जारी की थी। इस सूची में सोनभद्र के उद्योगों का जिक्र नहीं है, जबकि यहां फ्लाई ऐश से ईंट बनाने वाले छह प्लांट के साथ सेनेटरी पैड बनाने का प्लांट स्थापित किया गया था।
जिले में बंद पड़े पंचायत उद्योगों के बारे में सूचना मुख्यालय को भेजी गई थी। उस सूची में यहां के उद्योग का जिक्र होना चाहिए। शासन स्तर ही से बंद पड़े पंचायत उद्योगों को चालू करने की योजना बनाई जा रही है। विभाग से फंड मिलने पर सेनेटरी पैड बनाने के प्लांट को भी चालू कराया जाएगा। -नमिता शरण, जिला पंचायत राज अधिकारी।