साल दर साल बीतने के साथ बेटे के घर लौटने की हर उम्मीद टूटती गई। इस बीच रविवार को जब अचानक बेटा उनके सामने आया तो वह हैरान रह गए। उनकी खुशियों का कोई ठिकाना ही नहीं था। मां-बाप अपने बेटे को गले लगाकर चूमते रहे।
बेटा भी अपने मां-बाप को पाकर आह्लादित हो उठा। बचपन की पुरानी यादें उनकी आंखों के सामने ताजा हो गई। मां-बाप और बेटे के मिलन का यह दृश्य भावुक करने वाला था। मौके पर नगवां ब्लाक प्रमुख आलोक सिंह, प्रधान सुरेश शुक्ल, राजकुमार, गिरीश पांडेय, सूर्यकांत चौबे, मनोज दुबे आदि ने सुखविंदर सिंह बदेसा को साधुवाद दिया।
मुलायम की मां को माला पहनाते पंजाब पुलिस के अधिकारी
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पंजाब से मुलायम को अपने साथ लेकर पहुंचे एएसआई सुखविंदर सिंह बदेसा ने बताया कि 10 फरवरी को मुलायम ठेकेदार के माध्यम से उनके अमृतसर घर पर काम करने आया। काम करते हुए मोबाइल पर वह सैड सांग सुनता था। सुखविंदर ने मुलायम से उसकी तकलीफ जानने की कोशिश की तो चौंकाने वाला मामला सामने आया।
मुलायम ने बताया कि उसके पिता का नाम अमर सिंह है। वह झारखंड, सोनभद्र तो बता रहा था लेकिन गांव का नाम भूल चुका था। उसे टोला चरघरवा का नाम याद था। इसी आधार पर सुखविंदर सिंह ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर कई लोगों से बात की। बेहतर रिस्पांस नहीं मिला, मगर वह हार नहीं माने।
सोशल मीडिया पर सोनभद्र मे चरघरवा की तलाश करते हुए पूर्वांचल नव निर्माण मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गिरीश पांडेय का नंबर निकाला और उनसे बात की और पूरा वाकया बताया। इसे गंभीरता से लेते हुए मंच के गिरीश ने मुलायम के घरवालों की तलाश शुरू की। इसमें वरिष्ठ पत्रकार विनय सिंह चंदेल की भूमिका भी सराहनीय रही।
अमौली के प्रधान सुरेश शुक्ला और बसौली के प्रधान अवधेश गुप्ता से बात करने पर जानकारी हुई कि बहुआर गांव में चरघरवा टोला है। फिर क्या था प्रधान सुरेश शुक्ला मुलायम के घर पहुंचे और मुलायम के गायब होने की पुष्टी की। वीडियो के आधार पर अपने परिजनों की पहचान मुलायम ने कर ली। इसके बाद सुखविंदर सिंह बदेसा ने खुद मुलायम को लेकर 12 मार्च की रात राबर्ट्सगंज पहुंचे।