सोनभद्र। बेसिक शिक्षा विभाग के 200 विद्यालयों में जर्जर हालत में पड़े भवन-कक्षों के ध्वस्तीकरण के साथ ही उसके निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। डीएम चर्चित गौड़ की पहल पर बीएसए मुकुल आनंद पांडेय की तरफ से भवनों-कक्षों का चिह्नांकन कराकर उनके ध्वस्तीकरण और उनकी जगह नए निर्माण-मरम्मत का प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेज दिया गया है।
इन विद्यालयों में निर्माण कार्य डीएमएफ व सीएसआर के जरिये कराने की पहल की जाएगी। बारिश के दौरान किसी तरह के हादसे-अप्रिय स्थिति न बनने पाए, इसके लिए संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापकों को जर्जर भवन-कक्षों पर बड़े आकार में क्रॉस के निशान लगाने के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों को भी ऐसे भवनों-कमरों को दूर रखने की हिदायत दी गई है। कहा गया है कि बच्चों को सुरक्षित रखते हुए अच्छे हालत में कमरों में बैठाया जाए। जिले के 200 ऐसे विद्यालय हैं, जहां या तो भवन जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं या फिर कक्ष की स्थिति खराब है। कई भवनों-कमरों को मरम्मत की भी जरूरत है। इसके चलते यहां अध्ययनरत बच्चों की अतिरिक्त कक्ष में जैसे-तैसे पढ़ाई कराई जा रही है। या फिर किसी दूसरे भवन या किसी मकान के बरामदे का सहारा लेना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर निष्प्रयोज्य घोषित भवन में ही जोखिम के बीच बच्चों को पढ़ाने की विवशता बनी हुई है। चतरा ब्लॉक के पनिकप, बभनी ब्लॉक के शीश टोला, घोरावल ब्लॉक के छाइन, राबर्ट्सगंज ब्लॉक के लखनपुरवा, करमा ब्लॉक के भटौलिया, करकोली, कोन ब्लॉक के मिश्री, बरवाखाड़, चोपन ब्लॉक के जमुना, झरिया टोला सहित कई ऐसे विद्यालय हैं, जहां के भवनों की स्थिति खासी जर्जर बताई जा रही है।