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एनटीपीसी सिंगरौली की छठी इकाई से उत्पादन शुरू, सातवीं में अभी वक्त

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एनटीपीसी सिंगरौली (शक्तिनगर) की 500 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता की छठवीं इकाई शनिवार रात लाइटअप होने के करीब चार घंटे बाद लोड पर आ गई। रविवार को छठवीं इकाई से क्षमता मुताबिक उत्पादन करना शुरू कर दिया गया।
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दो हजार मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता के पावर प्रोजेक्ट स्थित पांच-पांच सौ मेगावाट क्षमता की दो इकाइयों के बंद होने से पावर प्रबंधन में खलबली मच गई थी। उत्पादन हजार मेगावाट के नीचे गिर गया था। पांच सौ मेगावाट की सातवीं यूनिट को केबिल गैलरी में आग लगने के बाद बंद करना पड़ा था। इतने ही मेगावाट क्षमता की छठवीं इकाई ट्यूब लिकेज के कारण बंद हो गई थी। शनिवार रात 10:35 बजे छठवीं इकाई को अभियंताओं ने अथक प्रयास कर लाइटअप कर लिया। रात 2:43 बजे यह इकाई लोड पर आ गई। रविवार सुबह यह इकाई क्षमता अनुरूप उत्पादन करने लगी। इसके बाद प्रोजेक्ट के अफसरों को थोड़ी राहत मिली। केबिल गैलरी में आग के चलते बंद सातवीं इकाई को शुरू करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि गैलरी से गुजरी सौ से अधिक केबिलों की जांच की जा रही और यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि आग कैसे भड़की। प्रोजेक्ट के कर्मचारियों का कहना है कि सातवीं यूनिट के बंद होने से पावर प्रोजेक्ट को बड़ी क्षति पहुंची है। एनटीपीसी शक्तिनगर की जनसंपर्क अधिकारी रिंकी गुप्ता ने बताया कि छठवीं इकाई पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन कर रही है। सातवीं इकाई को लाइटअप करने में वक्त लगेगा।
केबिल गैलरी का कचरा बना कारण
एनटीपीसी शक्तिनगर में स्थित पांच सौ मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता की सातवीं इकाई के केबिल गैलरी में भड़की आग के पीछे गैलरी में जमा कचरे (कोयले के कण) को कारण बताया जा रहा है। यह अलग बात है कि अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों का कहना है कि केबिल गैलरी की नियमित सफाई नहीं हो पा रही थी। इसके वजह से कोयले के कण जमा हो गए थे। आग किसी एक केबिल में लगी लेकिन ज्वाला भड़काने का काम कोयला के जमा कणों ने किया। घटना के लिए जिम्मेदार कौन है व किस स्तर पर लापरवाही हुई यह तो जांच के बाद उजागर होगा।
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