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एनटीपीसी विंध्याचल में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट, कार्बन डाई ऑक्साइड से बनेगा मिथेनॉल

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देश के संयंत्रों से बढ़ते प्रदूषण को रोकनेे केे लिए एनटीपीसी विंध्याचल विशेष प्लांट स्थापित करेगा। इससे कार्बन डाई ऑक्साइड को पकड़ (कैप्चर) कर हाइड्रोजन के जरिये मिथेनॉल बनाया जा सकेगा। फिलहाल इस प्रोजेक्ट पर करीब सौ करोड़ खर्च होंगे। देश में यह पहला पायलट प्रोजेक्ट होगा। इससे जहां प्रदूषण में कमी आएगी, वहीं बाई प्रोडेक्ट के रूप में उत्पादित मिथेनॉल का प्रयोग भी उपयोगिता के आधार पर किया जा सकेगा।
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बुधवार को विंध्याचल परियोजना प्रमुख सुभाष चंद्र नायक ने इस प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रशासनिक भवन के सीवी रमन सभागार में परियोजना प्रमुख ने विंध्याचल की गतिविधियों, संयंत्र की उपलब्धियों एवं सामाजिक गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विंध्याचल राष्ट्र का सर्वाधिक उत्पादन क्षमता वाला विद्युत संयंत्र है, जहां कोयला, सोलर और हाइड्रो से बिजली का कुल 4783 मेगावाट विद्युत का उत्पादन किया जा रहा है। एनटीपीसी विंध्याचल पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी तरह समर्पित है। बताया कि यह पायलेट प्रोजेक्ट पहली बार एनटीपीसी विंध्याचल में स्थापित किया जा रहा है।
पावर प्लांट से उत्सर्जित फ्लाई ऐश के उपयोग को चुनौती बताते हुए परियोजना प्रमुख ने कहा कि ऊर्जा संयंत्रों के लिए फ्लाई ऐश की शत-प्रतिशत उपयोगिता का लक्ष्य बनाया गया है। फिलहाल उत्सर्जित राख का 40 प्रतिशत विभिन्न स्थानों जैसे सीमेंट उद्योग, राष्ट्रीय निर्माण कार्यों सहित ऐश ब्रिक्स में उपयोग हो रहा है। परियोजना प्रमुख ने बताया कि संयंत्र से उत्सर्जित हानिकारक सल्फर डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी के साथ पर्यावरण को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। इस दौरान जीएम एचआर प्रबीर कुमार विश्वास सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। संचालन उप प्रबंधक (मानव संसाधन) एलएम पांडेय ने किया। आभार एजीएम एस. भट्टाचार्या ने जताया।
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