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Sonebhadra News: 150 किमी दूर से सुबह 8 बजे आ गए मरीज, 150 मीटर की दूरी तय नहीं कर पाए डॉक्टर

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अस्पताल में डॉक्टर का कक्ष खाली पड़ा। संवाद - फोटो : संवाद
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सोनभद्र। लोढ़ी स्थित मेडिकल कॉलेज में 150 किमी दूर से मरीज सुबह 8 से 9 बजे तक आकर नंबर लगा लेते हैं, लेकिन 150 मीटर दूर बने परिसर और आसपास ही रहने वाले डॉक्टर समय पर नहीं पहुंचते। वहां ओपीडी कक्ष में सोमवार को सवा नौ बजे तक अधिकांश डॉक्टरों की कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। परिसर स्थित जिला अस्पताल वाली बिल्डिंग में जहां डॉक्टरों के कक्ष खाली रहे। वहीं एल टू भवन में भी अधिकांश डॉक्टरों के कक्ष भी सूने पड़े रहे। आर्थो विभाग की ओपीडी और इमरजेंसी चालू मिली। जिन डॉक्टरों के कक्षों की कुर्सियों खाली थी, उनके बारे में पता करने पर किसी को रास्ते में तो किसी को राउंड पर होने का दावा किया जाता रहा।
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सुबह 8.15 से 9 बजे के बीच मेडिकल कॉलेज परिसर वाले बिल्डिंग के निचले तल पर संचालित ओपीडी कक्ष का हाल जाना गया तो वहां मरीज सुबह आठ बजे से ही आकर इंतजार करते मिले। आधे ओपीडी कक्ष के दरवाजे बंद पड़े हुए थे वहीं जो खुले भी थे उनकी कुर्सियां खाली थी। एक्सरे-अल्ट्रासाउंड कक्ष में स्टाफ तो मौजूद थे लेकिन ओपीडी में डॉक्टरों के न रहने से उनके यहां भी पहुंचने वाले मरीजों की संख्या न के बराबर थी। यहां के बाद सुबह नौ बजे से सवा नौ बजे के बीच मेडिकल काॅलेज के एलटू भवन का हाल जाना गया तो वहां फिजिशियन और जनरल सर्जरी की ओपीडी में डॉक्टरों की कुर्सियां खाली मिलीं। डॉक्टर के बारे में जानकारी करने पर बताया गया कि राउंड पर गए हैं। कब तक मुलाकात हो पाएगी? इस पर जवाब मिला 10 बजे तक। आर्थो कक्ष की ओपीडी सेक्शन के बाहर कई मरीज बारी का इंतजार करते मिले। कक्ष का दरवाजा बंद किया गया था। डॉक्टरों के सुबह देर तक ओपीडी कक्ष में न बैठने के बारे में जानकारी के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रहे उप चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. तपन मंडल से भी संपर्क साधने की कोशिश हुई लेकिन वह उपलब्ध नहीं हुए।
प्रधानाचार्य डाॅ. आनंद ने बताया कि चिकित्सा व्यवस्था की प्रशासनिक जिम्मेदारी डाॅ.मंडल को दी गई है। वह भी बीच-बीच में समय निकालकर निगरानी करते रहते हैं। मरीजों को अच्छी से अच्छी सुविधा मिले इसका लगातार प्रयास जारी है। डॉक्टर निर्धारित समय में मरीजों के लिए उपलब्ध हों, इसके कड़े निर्देश दिए जा रहे हैं।
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समय से डॉक्टर नहीं मिलते तो जांच, एक्सरे के लिए भी होना पड़ता है परेशान
मरीजों के देर से पहुंचने का सबसे ज्यादा असर मरीजों पर पड़ता है। दूर-दराज से आने वाले मरीज सुबह जल्दी इसलिए पहुंचते हैं कि उसी दिन जांच रिपोर्ट उपलब्ध हो जाएगी तो दूसरे दिन नहीं आना पड़ेगा। अगर डॉक्टर देर से पहुंचते हैं तो मरीजों की अच्छी-खासी भीड़ इकट्ठा हो जाती है। इसके चलते पहले डॉक्टर को दिखाने में वक्त जाया करना पड़ता है फिर जांच के लिए लाइन लगानी पड़ती है। इसी के चक्कर में जांच रिपोर्ट मिलने में देर हो जाती है। दोपहर दो बजे ओपीडी का समय खत्म होने के बार मरीजों को फिर से दूसरे दिन आने के लिए लंबी दौड़ लगानी पड़ती है।
सर की नसों में तेज दर्द की शिकायत थी। स्थानीय स्तर पर किसी डॉक्टर ने उसे सीटी स्कैन कराने की सलाह दी थी। उसके लिए सही क्या होगा? इसकी सलाह लेने, जांच कराने के लिए वह आधे घंटे से डॉक्टर का इंतजार कर रही थी। -शुभगिया देवी, फफराकुंड
पेट दर्द की शिकायत थी। अपने पिता के साथ डॉक्टर को दिखाने और अल्ट्रासाउंड कराने के लिए डॉक्टर से लिखवाने के लिए पहुंची। वह आधे घंटे से आए हुए हैं। फोन के जरिए डॉक्टर से बात की है। उन्होंने रास्ते में होने की जानकारी दी है। -अनुश्री, ओबरा
12 वर्षीय बेटे अभिषेक को सिर में शनिवार को चोट लग गई थी। स्थानीय स्तर पर कराए गए दवा-इलाज में राहत न मिलने पर वह सुबह आठ बजे ही बेटे को लेकर मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल वाले भवन में पहुंच गए थे लेकिन नौ बजे तक डॉक्टर से उनकी मुलाकात नहीं हुई थी।-चंद्रशेखर, चंदौली
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