इमरजेंसी में ढूंढना पड़ता है सिलिंडर
जिला अस्पताल में रोजाना 800 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें से 10-12 मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इमरजेंसी में एक साथ कई मरीजों के आने पर दिक्कत हो जाती है। बेड पर ऑक्सीजन न होने से सिलिंडर ढूंढना पड़ता है।
कई बार वार्ड में कर्मचारी न होने पर मरीजों के तीमारदार ही दूर से सिलिंडर खींचकर बेड तक लाते हैं। ऑक्सीजन प्लांट लगने के बाद उम्मीद थी कि हर बेड पर ऑक्सीजन होने से उपचार में सहूलियत मिलेगी, मगर जिम्मेदारों की अनदेखी भारी पड़ रही है।
ऐसे काम करता है प्लांट
प्लांट में ऑक्सीजन लिक्विड फॉर्म में तैयार होती है। जिसे बड़े टैंक में स्टोर किया जाता है। मरीजों तक ऑक्सीजन की सप्लाई पहुंचाने को पाइपलाइन बिछी हुई है। टैंक खाली होने पर फिर से प्लांट के जरिए इसे भरा जाता है।
बोले अधिकारी
ऑक्सीजन प्लांट कुछ महीने से खराब है। मरम्मत के लिए संस्था को पत्र लिखा गया है। टीम निरीक्षण भी कर चुकी है, मगर तकनीकी दिक्कत दूर नहीं हो पाई है। फिलहाल सिलिंडर और कंसंट्रेटर की मदद से मरीजों को ऑक्सीजन मुहैया कराया जा रहा है। इंजीनियर को फिर से बुलाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। - डॉ. बी.सागर, सीएमएस।