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Sonbhadra News: ऑक्सीजन प्लांट की उखड़ी सांस, कहीं ताला बंद तो कहीं चोर ले गए सामान; बढ़ीं दिक्कतें

Sat, 13 Jul 2024 07:53 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र

सार

Sonbhadra News: सोनभद्र में जिले के अस्पतालों में लगे ऑक्सीजन प्लांट की हालत काफी दयनीय है। देख रेख के अभाव में ये दम तोड़ने लगे हैं। इसका खामियाजा मरीजों और तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पतालों में अलग-अलग बेड पर ऑक्सीजन पहुंचाने में भी दिक्कत हो रही है।
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सोनभद्र के एक अस्पताल में लगा ऑक्सीजन प्लांट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना काल में सैकड़ों मरीजों को नई जिंदगी देने वाले ऑक्सीजन प्लांट देख-रेख के अभाव में दम तोड़ने लगे हैं। जिले के अस्पतालों में लगे ज्यादातर प्लांट बंद पडे़ हैं। कहीं चोर तार व उपकरण निकाल ले गए तो कहीं अन्य तकनीकी दिक्कतों से प्लांट नहीं चल पा रहा। 

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पाइप लाइन की बजाय मरीजों को सिलिंडर से ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे मरीजों को देरी का खामियाजा उठाना पड़ रहा है तो डॉक्टर-कर्मचारी भी दिक्कत महसूस कर रहे हैं।

तीन साल पहले कोरोना की दूसरी लहर में लोगों की सांसों पर संकट आया तो अचानक से ऑक्सीजन की मांग बढ़ गई थी। समय से ऑक्सीजन उपलब्ध न होने से कइयों की जान चल गई। इस महामारी से निपटने के लिए सरकार ने अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च कर ऑक्सीजन प्लांट लगवाए। 
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जिला अस्पताल परिसर में ही अलग-अलग क्षमता के चार प्लांट लगे हैं। एल-2 अस्पताल के पास एक मिनट में 1500 लीटर और पांच सौ लीटर ऑक्सीजन देने वाले दो प्लांट लगे हैं। दो अन्य प्लांट जिला अस्पताल के मुख्य भवन के पास है। इनकी क्षमता भी 1500 लीटर और 45 लीटर प्रति मिनट है। 

वर्तमान में कोई भी प्लांट चालू हालत में नहीं है। जिला अस्पताल में लगे 1500 लीटर क्षमता वाला प्लांट करीब ढाई माह से खराब है। इसके कुछ उपकरण चोर निकाल कर ले गए हैं। एल-2 अस्पताल के पास लगे प्लांटों का हाल भी ऐसा ही है। 

सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में अराजक तत्वों के निशाने पर आया यह प्लांट बंद है। ऐसे में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को सिलिंडर से ऑक्सीजन मुहैया कराया जा रहा है। विशेष स्थिति में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की मदद भी लेनी पड़ती है। 

अलग-अलग बेड तक ऑक्सीजन सिलिंडर पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। कभी कर्मचारी नहीं मिलते तो कभी दूर के कमरों से ऑक्सीजन सिलिंडर लाने में वक्त लगता है। इससे उपचार प्रभावित हो रहा है।

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इमरजेंसी में ढूंढना पड़ता है सिलिंडर
जिला अस्पताल में रोजाना 800 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें से 10-12 मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इमरजेंसी में एक साथ कई मरीजों के आने पर दिक्कत हो जाती है। बेड पर ऑक्सीजन न होने से सिलिंडर ढूंढना पड़ता है।

कई बार वार्ड में कर्मचारी न होने पर मरीजों के तीमारदार ही दूर से सिलिंडर खींचकर बेड तक लाते हैं। ऑक्सीजन प्लांट लगने के बाद उम्मीद थी कि हर बेड पर ऑक्सीजन होने से उपचार में सहूलियत मिलेगी, मगर जिम्मेदारों की अनदेखी भारी पड़ रही है।

ऐसे काम करता है प्लांट
प्लांट में ऑक्सीजन लिक्विड फॉर्म में तैयार होती है। जिसे बड़े टैंक में स्टोर किया जाता है। मरीजों तक ऑक्सीजन की सप्लाई पहुंचाने को पाइपलाइन बिछी हुई है। टैंक खाली होने पर फिर से प्लांट के जरिए इसे भरा जाता है।

बोले अधिकारी
ऑक्सीजन प्लांट कुछ महीने से खराब है। मरम्मत के लिए संस्था को पत्र लिखा गया है। टीम निरीक्षण भी कर चुकी है, मगर तकनीकी दिक्कत दूर नहीं हो पाई है। फिलहाल सिलिंडर और कंसंट्रेटर की मदद से मरीजों को ऑक्सीजन मुहैया कराया जा रहा है। इंजीनियर को फिर से बुलाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। - डॉ. बी.सागर, सीएमएस।
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