दुद्घी क्षेत्र केखजूरी के मुसहर बस्ती अधूरा पड़ा शौचालय
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सोनभद्र। जिले की सभी 637 ग्राम पंचायतों में मांगलिक कार्यक्रमों व अन्य आयोजनों में पहुंचने वाले लोगों की सुविधा के लिए सामुदायिक शौचालयों के निर्माण की योजना प्रस्तावित है। इस योजना पर काम शुरू हुए दो महीने से अधिक समय बीत गए और अब तक सिर्फ 112 सामुदायिक शौचालय ही बनकर तैयार हो पाए हैं। अन्य 525 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण का कार्य जारी है। वहीं स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के बेस लाइन सर्वे में कागजों पर 296176 लाभार्थियों के शौचालयों के निर्माण पूरे दिखा दिए गए हैं। जबकि हकीकत में अभी काफी संख्या में शौचालयों के निर्माण पूरे नहीं हुए हैं।
पंचायती राज विभाग से मिली जानकारी के अनुसार स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत बेसलाइन सर्वे के प्रथम चरण में 198309 लाभार्थियों के शौचालयों का निर्माण कार्य कराए गए थे। छूटे परिवारों को एलओबी में 78979 शौचालयों के निर्माण कार्य पूरे कराए गए हैं। इसके अलावा अभी अन्य योजनाओं के तहत 18888 परिवारों को शौचालय की सुविधा से लाभान्वित किया गया है। उधर, जिला प्रशासन की तरफ से भी 637 ग्राम पंचायतों में मांगलिक व अन्य अवसरों पर जुटने वाली भीड़ को देखते हुए सामुदायिक शौचालय बनवाने की योजना दो महीने पहले स्वीकृत की गई थी। उस दौरान संबंधित विभागों को जल्द से जल्द शौचालयों के निर्माण की हिदायत दी गई थी। इस बीच दो माह बीत गए और अब तक सिर्फ 112 सामुदायिक शौचालयों के निर्माण पूरे हो पाए हैं। इसके अलावा 68 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों के छत एवं 89 गांवों में सामुदायिक शौचालय दरवाजा स्तर तक बन चुके हैं। अन्य स्थानों पर अभी सामुदायिक शौचालयों के निर्माण प्रारंभिक चरण में हैं। यह स्थिति तब है जबकि ओडीएफ टीम व सफाई कर्मियों को ग्रामीणों को शौचालयों का प्रयोग करने के लिए जागरूक करने को लगाया गया है। उधर, जागरूकता की स्थिति यह है कि नक्सल प्रभावित दुरूह क्षेत्रों के रहवासियों को जागरूक करने के लिए वहां बहुत कम लोग पहुंच रहे हैं। इस नाते कई लोग जानकारी के अभाव में शौचालय बनने के बाद भी उसका उपयोग नहीं कर रहे हैं।
कोट
ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने के निर्देश पंचायत सचिव और ग्राम प्रधानों को दिया गया है। खुद भी सामुदायिक शौचालयों के निर्माण कार्यों की मानीटरिंग कर रहे हैं ताकि जल्द निर्माण पूरा हो सके।- विशाल सिंह, डीपीआरओ।