बारिश के साथ ही जिले में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इससे निपटने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां अधूरी हैं। जिले में पिछले दो साल से मच्छरदानी की खरीद अधर में लटकी है। इसके पीछे बजट न होना कारण बताया जा रहा है।
ऐसे में आने वाले दिनों में आदिवासी इलाकों में परेशानी बढ़ सकती है। बारिश के मौसम में वातावरण में नमी, जलभराव और साफ-सफाई की कमी के चलते बीमारियों के मामले और इसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ जाता है।
इस मौसम में सबसे ज्यादा खतरा मच्छरों और दूषित पानी के कारण संक्रमण फैलने लगता है। ये बीमारियां बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को सबसे ज्यादा अपना शिकार बनाती हैं।
मच्छर जनित रोगों के कारण हर साल जिले में बड़ी आबादी प्रभावित होती है। इन दिनों जिले में मलेरिया के साथ ही डेंगू का खतरा बढ़ गया है। अति संवेदशील जिले में हर साल डीएमएफ और स्वास्थ्य विभाग के बजट से मच्छरदानी की खरीद होती है।
जिससे अति पिछले और मलेरिया और डेंगू प्रभावित गांवों में जरूरतमंदों को स्वास्थ्य विभाग मच्छरदानी का वितरण करता था। जिले में वित्तीय वर्ष 2024-25 में मच्छरदानी की खरीद नहीं हुई। ऐसे में पिछले सत्र की बची कुछ मच्छरदानी का वितरण कर खानापूर्ति हुई।
विभाग के पास मच्छरदानी के लिए बजट का अभाव बताया जा रहा है। ऐसे में इस सत्र में भी मच्छरदानी की खरीद प्रक्रिया ठंडे बस्ते में है।
जिले में पिछले साल किन्ही कारणों से मच्छरदानी की खरीद नहीं हो सकी थी। अब मच्छर जनित रोगों पर नियंत्रण में स्वास्थ्य विभाग को काफी सफलता मिली है। मच्छरदानी के वितरण और खरीद को लेकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। -
डॉ. अश्वनी कुमार,सीएमओ।