सोनभद्र। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की जुगाड़ व्यवस्था भी ध्वस्त हो गई है। अब अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को पहले से नंबर नहीं मिलेगा। उनके अस्पताल आने पर अगर डॉक्टर मौजूद हैं तभी जांच होगी। निजी केंद्रों के चिकित्सकों के आए दिन नदारद रहने से मरीजों को हो रही परेशानी के मद्देनजर प्रबंधन ने यह फैसला लिया है। ऐसे में अब मरीजों के लिए जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराना और भी कठिन हो गया है।
जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में दस से अधिक रेडियोलाजिस्ट के पद रिक्त हैं। जिला अस्पताल में भी यह पद पिछले दो साल से खाली है। मरीजों की परेशानी को देखते हुए निजी केंद्रों के चिकित्सकों का रोस्टर बनाकर एक-एक दिन जिला अस्पताल में सेवा देने के लिए नामित किया गया था। मरीजों की भीड़ न लगे, इसके मद्देनजर उन्हें पहले से टोकन देकर नंबर आवंटित कर दिए जाते थे। डेढ़ से दो माह बाद मिलने वाले नंबर के दिन जब मरीज आते थे तो कभी डॉक्टर नहीं होते थे तो कभी अन्य दिक्कत से मरीजों को लौटना पड़ता था। दूरदराज से आने वाले मरीजों में इससे असंतोष बना हुआ था। पिछले कुछ महीनों से निजी केंद्र के चिकित्सक अक्सर गायब रह रहे हैं या टेक्नीशियन और अन्य स्टॉफ को भेज रहे हैं। स्थिति यह है कि अस्पताल में निजी केंद्रों के जिन चिकित्सकों की ड्यूटी लगी है, वह उस दिन आएंगे या नहीं इसका कोई ठिकाना नहीं होता। ऐसे में अब अल्ट्रासांउड के लिए नंबर मिलना बंद हो गया है। अगर चिकित्सक या फिर टेक्नीशियन पहुंचते हैं तो उस दिन मौके पर उपलब्ध मरीजों की जांच कर दी जा रही है और अगर चिकित्सक नहीं आए तो मरीजों को लौटा दिया जाता है। उन्हें जांच की कोई तिथि भी नहीं बताई जा रही है। बृहस्पतिवार को राबर्ट्सगंज नगर स्थित एक निजी सेंटर के महिला चिकित्सक की ड्यृटी लगाई गई थी, जो नहीं पहुंचीं। इससे काफी मरीजों को लौटना पड़ा। काफी देर बाद एक अन्य सेंटर के चिकित्सक पहुंचे तो 13 मरीजों की जांच हुई।
चिकित्सक को दूसरी जगह भेजा
जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं होने से सेवाएं प्रभावित हैं। पूर्व में निजी चिकित्सकों के अलावा प्रशिक्षण प्राप्त एक जेआर की ड्यूटी भी अल्ट्रासाउंड के लिए लगाई जाती थी। पिछले कुछ दिनों से वह भी नहीं आ रहे। उनकी ड्यूटी अन्यत्र लगा दी गई है।
जिला अस्पताल में मरीजों को परेशानी न हो इसके लिए निजी केंद्रों के चिकित्सकों ड्यूटी लगाई जाती है। उन्हें समय से पहुंच कर जांच करनी होती है। अगर लापरवाही मिलती है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।