खनन व्यवसाय के लिए पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेना अब आसान होगा। शासन ने इस प्रक्रिया को अब और सरल बना दिया है। एनओसी देने के लिए दो जिला स्तरीय पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्राधिकरण का गठन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में किया गया है। एक में चार और दूसरे में 11 सदस्य होंगे। पांच हेक्टेयर तक की खनन लीज के लिए यह प्राधिकरण एनओसी देगा। इसको लेकर प्रशासनिक स्तर पर कवायद भी शुरू कर दी गई है। एनओसी मिलने से खनन पट्टा अस्तित्व में आने पर श्रमिकों को रोजगार मिलेगा।
सोनभद्र में खनिज संपदा की प्रचुरता है। यहां पत्थर, बालू का उद्योग बड़े पैमाने पर होता है।
पत्थर, बालू, मोरंग का खनन पट्टा कराने के लिए ठेकेदारों को कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। वन विभाग, पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना पड़ता है। पहले खनन पट्टे के लिए पर्यावरण की एनओसी के लिए राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्राधिकरण लखनऊ कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता था। अब राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया को सरल कर दिया है।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार की अधिसूचना के अनुपालन में राज्य सरकार ने पांच हेक्टेअर तक के पट्टों के लिए दो जिला स्तरीय पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्राधिकरण अथारिटी का गठन किया है। एक कमेटी पर्यावरण मंत्रालय की ओर से होगी, जिसके अध्यक्ष जिलाधिकारी होंगे, जबकि एसडीएम मुख्यालय सदस्य सचिव और सीनियर डीएफओ व कमिश्नर या मुख्य वन संरक्षक से नामित एक सदस्य होगा। दूसरी कमेटी विशेषज्ञ आंकलन समिति की होगी।
एडीएम रामचंद्र एवं खान अधिकारी पीके सिंह ने बताया कि दूसरी समिति में सिंचाई विभाग के सीनियर कार्यपालक अभियंता अध्यक्ष होंगे, जबकि खनन अधिकारी सदस्य सचिव होंगे। इसके अलावा वन विभाग का सीनियर डिप्टी डीएफओ, राज्य भूगर्भ जल विज्ञान या डीएम से नामित सदस्य, स्वास्थ्य विभाग से नामित सदस्य, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नामित सदस्य और मंडलायुक्त से नामित तीन सदस्य होंगे। डीएम ने इसको लेकर कार्रवाई का निर्देश दिया है।